Ahmedabad मंडल में रेलवे फूड विजिलेंस फोर्स का बड़ा एक्शन, 40 लाख का जुर्माना, एक बेस किचन सील
Ahmedabad मंडल में रेलवे फूड विजिलेंस फोर्स का बड़ा एक्शन, 40 लाख का जुर्माना, एक बेस किचन सील
NewsPoint•
पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में यात्रियों को साफ-सुथरा और बढ़िया खाना मिले, इसके लिए रेलवे फूड विजिलेंस फोर्स ने एक बड़ा एक्शन लिया है. मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) वेद प्रकाश की 'जीरो टॉलरेंस' यानी किसी भी तरह की ढील न देने की नीति के तहत, रेलवे की टीम ने कई जगहों पर अचानक छापे मारे. इस दौरान खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा और साफ-सफाई के नियमों को तोड़ने के कई मामले सामने आए. इसके चलते रेलवे प्रशासन ने दोषी खानपान सेवा देने वालों पर करीब 40 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है और एक बेस किचन को तुरंत बंद कर दिया है. रेलवे के अधिकारियों की खास टीम ने एक साथ 15 जगहों पर बने बेस किचन और खानपान की दुकानों की जांच की. इस जांच में खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी, साफ-सफाई, उन्हें रखने का तरीका, सुरक्षा के नियम और जरूरी कागजात ठीक से रखे गए हैं या नहीं, इन सब बातों को परखा गया.
अहमदाबाद के डब्बा बाजार और सरसपुर में एक बेस किचन में खुले और बिना सील वाले मसाले मिले. वहां सड़ी हुई सब्जियां भी थीं और फ्रीजर भी खराब हालत में था. खाने-पीने की चीजों को पहले आने वाली को पहले इस्तेमाल करने (FIFO) के नियम का पालन नहीं हो रहा था. रसोई बहुत गंदी थी और कर्मचारियों के पास जरूरी सुरक्षा के सामान भी नहीं थे. खाने-पीने की चीजों को खुला रखा गया था. इन गंभीर गड़बड़ियों के कारण इस यूनिट पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे फौरन बंद कर दिया गया. साबरमती के धर्मनगर में एक बेस किचन में खराब फ्लाईकैचर (मक्खी पकड़ने वाला यंत्र), सड़े हुए आलू, वाशिंग लिक्विड की कमी और टूटी हुई ड्रेनेज जाली पाई गई. इस पर भी 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका गया. सरसपुर में ही एक और बेस किचन में तो हद ही हो गई, वहां खाना बनाया ही नहीं जा रहा था, बल्कि कहीं और से खाना मंगवाकर बेचा जा रहा था. इस गड़बड़ी के लिए भी 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.गुजरात यूनिवर्सिटी के पास विष्णु एस्टेट में एक बेस किचन में सड़े हुए आलू मिले, वहां मक्खियां भिनभिना रही थीं और साफ-सफाई का हाल बहुत बुरा था. मसाले खुले रखे थे, चपातियां अधपकी थीं और खाना पकाने के तापमान का कोई रिकॉर्ड नहीं था. इन कमियों पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. सरसपुर के वोरा का रोजा स्थित बेस किचन में तो सबसे ज्यादा 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा. वहां अप्रूव्ड वेंडर लिस्ट (जिनसे सामान खरीदना है, उनकी लिस्ट) नहीं थी, वेंटिलेशन (हवा आने-जाने की व्यवस्था) खराब थी, एक्सपायरी डेट पार कर चुके खाने के सामान रखे थे और साफ-सफाई की भी बड़ी दिक्कतें थीं. गांधीधाम के सपना नगर कॉलोनी और आदिपुर के रामबाग रोड पर दो बेस किचन बंद मिले, इसलिए दोनों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
मेहसाणा के मालगोदाम रोड पर एक बेस किचन में गैस सिलेंडर नहीं था और तय रसोई की जगह किसी और जगह से खाना मंगवाया जा रहा था. इस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. पालनपुर के बेस किचन में भी साफ-सफाई की कमी थी, सब्जियां खराब थीं. कच्चा और पका हुआ खाना ठीक से अलग नहीं रखा गया था. कर्मचारी एप्रन और हेड कवर (सिर ढकने वाला कपड़ा) नहीं पहन रहे थे. खुले में लकड़ी के ईंधन से खाना बन रहा था और जरूरी रिकॉर्ड भी ठीक से नहीं रखे जा रहे थे. इन सब बातों पर भी 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. विरमगाम के रिफ्रेशमेंट रूम में प्लेटफॉर्म पर अतिक्रमण, खराब साफ-सफाई, कॉकरोच और मक्खियों का होना, अनधिकृत विक्रेताओं का घूमना और कर्मचारियों का यूनिफॉर्म न पहनना जैसी शिकायतें मिलीं. इस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.
रेलवे प्रशासन ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुछ और बेस किचन और खानपान की जगहों की व्यवस्था ठीक पाई गई. अहमदाबाद मंडल ने सभी खानपान सेवा देने वालों को कुछ जरूरी हिदायतें दी हैं. उन्हें कहा गया है कि वे व्यक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखें, खाना सुरक्षित तरीके से बनाएं, चीजों को सही ढंग से स्टोर करें, नियमित रूप से सफाई करें, कचरे का सही निपटान करें, पेस्ट कंट्रोल (कीट नियंत्रण) करवाएं और जरूरी रिकॉर्ड को हमेशा अपडेट रखें. रेलवे अधिकारियों ने साफ किया है कि यात्रियों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का खाना देना भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा के नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भविष्य में भी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत ऐसे अचानक छापे और कार्रवाई जारी रहेंगी.