ईरान समझौते पर इजरायल में नाराजगी, अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध बिगड़ने की आशंका
ईरान समझौते पर इजरायल में नाराजगी, अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध बिगड़ने की आशंका
NewsPoint•
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर इजरायल ने नाराजगी जताई है। इजरायल का कहना है कि वह दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा। इजरायल के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आईडीएफ (IDF) लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा जोन में रहेगा। इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
न्यूयॉर्क, 18 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नए समझौते को लेकर इजरायल में भारी नाराजगी है। इजरायल का कहना है कि अमेरिका के किसी भी समझौते से वह बंधा हुआ नहीं है। एक पूर्व इजरायली महावाणिज्यदूत ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किए गए 14 सूत्रीय समझौते ने अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों को और खराब कर दिया है। पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने सीएनएन को बताया कि उन्हें इस समझौते का कोई भी बिंदु ऐसा नहीं दिखता जो अमेरिका, इजरायल या पूरे क्षेत्र को 28 फरवरी (जब हमला शुरू हुआ था) की तुलना में बेहतर स्थिति में लाता हो। पिंकास के अनुसार, हमलों से पहले ईरान प्रतिबंधों के कारण अलग-थलग था, जिससे उसके तेल निर्यात रुक गए थे और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ था। लेकिन इस नए समझौते के तहत, ईरान अब तेल निर्यात कर सकेगा, प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुंच सकेगा और 300 बिलियन डॉलर की विनिर्माण फंडिंग भी प्राप्त करेगा, जिससे वह बहुत मजबूत हो जाएगा। वहीं, नाटो के महासचिव मार्क रूट ने इस अमेरिकी समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने ब्रसेल्स में मीडिया से कहा कि वे इस डील का स्वागत करते हैं और मानते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अच्छी डील की है। उनके अनुसार, यह समझौता ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगा और नेविगेशन की स्वतंत्रता को बहाल करेगा। इससे पहले, 15 जून को इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा, जिसमें हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई जारी रखना भी शामिल है। कॉट्ज ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और वे एक स्पष्ट नीति पर चल रहे हैं। इसके तहत इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) बिना किसी समय सीमा के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में रहेगा। इसका उद्देश्य सीमा और इजरायली समुदायों को जिहादी तत्वों से बचाना है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा क्षेत्रों से स्थानीय लोगों को हटा दिया जाएगा और जमीन के ऊपर व नीचे के सभी आतंकवादी ढांचों को नष्ट कर दिया जाएगा। इसमें कॉन्टैक्ट-लाइन गांवों के घर भी शामिल हैं, जो आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के रूप में काम करते थे। इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा क्षेत्रों पर कब्जा बनाए रखना आईडीएफ की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। इसलिए, वे लेबनान से आईडीएफ की वापसी का विरोध करते हैं, चाहे वर्तमान में कितना भी दबाव हो या भविष्य में आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को बता दी थी। उन्होंने खुद भी अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को यह बात स्पष्ट कर दी थी। आईडीएफ भी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्रों पर कब्जा बनाए रखने का समर्थन करता है। वे इजरायल के सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे और सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेंगे।
पूर्व इजरायली महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने अमेरिकी मीडिया सीएनएन से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हस्ताक्षरित 14 सूत्रीय समझौते से अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध और बिगड़ गए हैं। पिंकास ने कहा, “मुझे उन 14 बिंदुओं में से एक भी बिंदु ऐसा नहीं दिख रहा है जो अमेरिका, इजरायल, बल्कि पूरे इलाके को 28 फरवरी (जब हमला शुरू हुआ था) की तुलना में बेहतर बनाते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि हमलों से पहले ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण वह काफी हद तक अलग-थलग पड़ गया था। उसके तेल का निर्यात रुक गया था और उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। लेकिन इस नए समझौते के तहत, ईरान को अब तेल निर्यात करने की अनुमति मिल जाएगी। साथ ही, वह अपनी प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुंच सकेगा और उसे 300 बिलियन डॉलर की विनिर्माण फंडिंग भी मिलेगी। पिंकास के अनुसार, इससे ईरान की ताकत बहुत बढ़ जाएगी।इस बीच, नाटो के महासचिव मार्क रूट ने ईरान के साथ हुए अमेरिकी समझौते का स्वागत किया है। ब्रसेल्स में नाटो के रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं सचमुच इस डील का स्वागत करता हूं। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अच्छी डील की है।” उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगा और नेविगेशन की स्वतंत्रता को वापस लाएगा।
इससे पहले, 15 जून को इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा। इसमें हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई को खत्म करना भी शामिल नहीं है। कॉट्ज ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और वे एक स्पष्ट नीति का पालन कर रहे हैं। इस नीति के तहत, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) बिना किसी निश्चित समय सीमा के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में बना रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों और इजरायली समुदायों को जिहादी तत्वों से सुरक्षित रखना है।
रक्षा मंत्री ने आगे बताया कि इन सुरक्षा क्षेत्रों से स्थानीय लोगों को हटा दिया जाएगा। साथ ही, जमीन के ऊपर और नीचे मौजूद सभी आतंकवादी ढांचों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। इसमें कॉन्टैक्ट-लाइन गांवों के वे घर भी शामिल हैं, जो आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे। इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा क्षेत्रों पर कब्जा बनाए रखना आईडीएफ की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। इसलिए, वे लेबनान से आईडीएफ की वापसी का कड़ा विरोध करते हैं, चाहे वर्तमान में कितना भी दबाव हो या भविष्य में आए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को साफ-साफ बता दी थी। उन्होंने स्वयं भी अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को इस बारे में अवगत करा दिया था। आईडीएफ भी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्रों पर अपना कब्जा बनाए रखने का समर्थन करता है। वे इजरायल के सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। इसलिए, वे सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेंगे।