राम मंदिर ट्रस्ट चंदा घोटाला: पूर्व डीजीपी ने सीबीआई जांच की मांग की, राजनीतिक बयानबाजी तेज

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अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित धन हेराफेरी का मामला गरमा गया है। पूर्व डीजीपी ने सीबीआई जांच की मांग की है। भाजपा विधायक ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाए हैं। सरकार मामले की बारीकी से निगरानी कर रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जनता सच जानना चाहती है।

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अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित धन हेराफेरी के मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की सिफारिश की है। वहीं, गाजियाबाद से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस मामले में समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला है और कहा है कि इसमें सपा का एक कार्यकर्ता शामिल था।

पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में इस मामले को "गंभीर आपराधिक कृत्य" बताया। उन्होंने कहा कि यह लंबे समय से चल रहा है और इसमें तुरंत केस दर्ज होना चाहिए। जैन ने जोर देकर कहा कि जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए ताकि बाहरी और निष्पक्ष अधिकारी इसकी छानबीन कर सकें। उन्होंने कहा कि जब से मंदिर के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ है, तब से ऐसे आरोप लगते आ रहे हैं। जनता को पूरा सच जानने का अधिकार है।
जैन ने यह भी कहा कि कोषाध्यक्ष को खुद आगे आकर मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा गठित सात दिनों की रिपोर्ट वाली कमेटी को एक अच्छा कदम बताया। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कानून से ऊपर कोई नहीं है। जो दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और जो निर्दोष हैं उन्हें बचाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

राम मंदिर चंदे के विवाद पर चिंता जताते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि कुछ लोग 200 करोड़ रुपए की बात कर रहे हैं, तो कुछ अलग-अलग आंकड़े बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच सामने आना चाहिए, वरना भविष्य में मंदिर को मिलने वाले दान पर असर पड़ेगा। लोग हर चीज पर शक करने लगेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि गिनती में शामिल सभी बैंक कर्मचारियों और स्टाफ के बयान दर्ज किए जाएं। टीम को बदला जाना चाहिए और दोषियों से पूरी वसूली होनी चाहिए। अगर यह एक गैंग बनाकर किया गया काम है, तो गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने की वकालत की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

दूसरी ओर, गाजियाबाद से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस मामले में समाजवादी पार्टी पर सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अब साफ हो गया है कि इसमें समाजवादी पार्टी का एक कार्यकर्ता शामिल था।" गुर्जर ने कहा कि सपा का एजेंडा ऐसे लोगों को अंदर घुसाकर राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय और धार्मिक कार्यों में रुकावटें पैदा करना है। उन्होंने कहा कि जब तक सपा के अपने लोग सामने नहीं आए थे, तब तक अखिलेश यादव दोषियों को पकड़ने की मांग कर रहे थे।

गुर्जर ने आगे कहा, "जैसे ही उनके लोगों के नाम सामने आए, उन्होंने एसआईटी जांच का विरोध शुरू कर दिया। यह उनके दोहरे चरित्र को दिखाता है।" उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसी वजह से सपा नेता एसआईटी जांच से असहज हैं।

यह पूरा मामला राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप हैं कि इस चंदे में कुछ गड़बड़ी हुई है और पैसों का गलत इस्तेमाल किया गया है। पूर्व डीजीपी जैन ने इस मामले को बहुत गंभीर बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, भाजपा विधायक गुर्जर ने इस मामले को राजनीतिक रंग देते हुए सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और सच कब सामने आता है। जनता को उम्मीद है कि इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।