ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा ऐतिहासिक, स्वतंत्रता और गरिमा का प्रतीक

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ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इसे देश की स्वतंत्रता और गरिमा की जीत बताया है। यह समझौता धमकी या दबाव के आगे न झुकने का प्रमाण है। ईरान ने शांति, सम्मान और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इस एमओयू पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है, जो देश की स्वतंत्रता, गरिमा और कूटनीतिक जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दर्शाता है कि ईरान ने कभी भी किसी धमकी या दबाव के आगे झुककर अपनी गरिमा और आजादी से समझौता नहीं किया। यह फैसला लोगों के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है। यह समझौता एक शक्तिशाली ईरान का संदेश देता है, जो आपसी सम्मान के आधार पर शांति की वकालत करता है। ईरान हमेशा से दुनिया में शांति बनाए रखने, अपनी गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करने, और विकास व क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चले आ रहे तनाव के बाद, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिजिटल माध्यम से इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में अपने समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाना (जिसमें लेबनान का भी जिक्र है), संप्रभुता का सम्मान करना, और ईरान पर से संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसे संगठनों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना।
फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ट्रंप ने इस समझौते को एक बड़ी सफलता बताया। उनका कहना था कि यह सैन्य दबाव और कूटनीति के मिले-जुले प्रयासों से संभव हुआ। ट्रंप ने कहा, “रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।” उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मुख्य उद्देश्य था।”

ट्रंप का मानना था कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होता। यह समझौता ईरान की कूटनीतिक परिपक्वता और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने की क्षमता को दर्शाता है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, "यह संदेश उस देश की आवाज को दिखाता है जिसने किसी भी धमकी या दबाव के सामने अपनी गरिमा और आजादी से समझौता नहीं किया।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज जो फैसला दर्ज किया गया है, वह देश के लोगों के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है।

यह समझौता ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ उसके संबंधों को सुधारने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। ईरान का इस्लामी गणराज्य हमेशा से दुनिया में शांति बनाए रखने, अपनी गरिमा और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने, साथ ही विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इस समझौते के माध्यम से, ईरान ने यह साबित किया है कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकता है। यह एक शक्तिशाली ईरान का संदेश है, जो यह बताता है कि शांति आपसी सम्मान की भावना में ही हासिल होगी।