शिरोमणि अकाली दल का 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू, सीएम भगवंत मान को हटाने की मांग, श्रीअकाल तख्त साहिब से घोषणा

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शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। यह मोर्चा श्रीअकाल तख्त साहिब से शुरू होगा। एसएडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने पवित्रता का अपमान किया है। अकाली दल ने सभी धार्मिक और राजनीतिक दलों से इस लड़ाई में साथ आने की अपील की है।

Navbharat Times
चंडीगढ़, 18 जून: शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने गुरुवार को श्रीअकाल तख्त साहिब से 19 जून को 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाना है, जिन पर 'घोर बेअदबी' यानी पवित्रता का घोर अपमान करने का आरोप लगाया गया है। एसएडी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने स्पष्ट किया कि यह धर्म युद्ध मोर्चा श्रीअकाल तख्त साहिब के आध्यात्मिक संरक्षण में चलाया जाएगा।

बादल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भगवंत मान ने गुरुओं और सिख नायकों के साथ जो किया है, वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मान ने सिख समुदाय के धैर्य की बहुत परीक्षा ली है और अब हद पार हो गई है। उन्होंने सभी धार्मिक संगठनों, संत समाज, धार्मिक हस्तियों, सिख विद्वानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और सभी राजनीतिक दलों से इस धर्म युद्ध मोर्चा में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि मिलकर भगवंत मान के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी, जिन्हें उन्होंने 'गुरु-द्रोही और पंथ-विरोधी' बताया है। इस अपील में आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सिख नेताओं को भी शामिल किया गया है।
एसएडी प्रमुख ने वरिष्ठ अकाली नेता सरदार बलविंदर सिंह भुंडर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समन्वय समिति का गठन भी किया है। इस समिति में महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, गुलजार सिंह रणीके, दलजीत सिंह चीमा और अमरजीत सिंह चावला जैसे नेता शामिल हैं। यह समिति जल्द ही बैठक करेगी और सभी से मान के खिलाफ इस सामूहिक धर्म युद्ध मोर्चे का हिस्सा बनने का आग्रह करेगी।

सुखबीर बादल ने यह भी घोषणा की कि जब तक भगवंत मान मुख्यमंत्री बने रहेंगे, तब तक एसएडी के विधायक विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मान के अपने परिवार, जिसमें उनकी बेटी भी शामिल है, ने उन पर नशे की हालत में सिख धार्मिक स्थलों पर जाकर उनकी पवित्रता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मान ने संसद और विधानसभा में जाकर सिख कौम को बदनाम किया है। एसएडी का यह कदम पंजाब की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य सरकार को चुनौती दे रहा है।