पश्चिम बंगाल चुनाव बाद हिंसा: सीबीआई ने 50,000 रुपये के इनामी घोषित अपराधी श्यामला बर्मन को सिलीगुड़ी से किया गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल चुनाव बाद हिंसा: सीबीआई ने 50,000 रुपये के इनामी घोषित अपराधी श्यामला बर्मन को सिलीगुड़ी से किया गिरफ्तार
NewsPoint•
पश्चिम बंगाल चुनाव बाद हिंसा और हत्या के मामले में सीबीआई ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी श्यामला बर्मन को सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी माणिक मैत्रा की हत्या से जुड़े मामले में हुई है।
कोलकाता, 18 जून। सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा और हत्या के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक घोषित अपराधी को सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया है। श्यामला बर्मन नाम के इस आरोपी को माणिक मैत्रा की हत्या और चुनाव बाद हिंसा के मामले में पकड़ा गया है। यह गिरफ्तारी सीबीआई की एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि आरोपी एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार था और जांच में शामिल नहीं हो रहा था। सीबीआई ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के 27 अगस्त 2021 के आदेश पर सीबीआई को सौंपा गया था। सीबीआई ने कूच बिहार के शीतलकुची पुलिस स्टेशन की एफआईआर को अपने हाथ में लिया था, जिसमें चुनाव बाद हिंसा और माणिक मैत्रा की हत्या के आरोप थे। जांच के बाद, सीबीआई ने 27 सितंबर 2021 को 6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद, 26 अप्रैल 2022 और 11 अगस्त 2022 को 18 और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर की गई।आरोपी श्यामला बर्मन काफी समय से छिप रहा था और कानूनी प्रक्रिया से बच रहा था। इस वजह से, माथाभांगा (जिला कूच बिहार) के एसीजेएम (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने 8 फरवरी 2022 को उसे 'घोषित अपराधी' करार दिया था। घोषित अपराधी का मतलब है कि अदालत ने उसे सार्वजनिक रूप से अपराधी घोषित कर दिया था और उसकी तलाश के आदेश दिए थे।
गिरफ्तारी के बाद, श्यामला बर्मन को सिलीगुड़ी की सक्षम अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। न्यायिक हिरासत का मतलब है कि उसे जेल में रखा जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीबीआई इस मामले में अपनी जांच और कार्रवाई जारी रखे हुए है, ताकि बाकी आरोपियों को भी पकड़ा जा सके और न्याय सुनिश्चित हो सके। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के मामलों में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीबीआई लगातार ऐसे फरार आरोपियों की तलाश कर रही है जो कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह की गिरफ्तारियां जनता में विश्वास पैदा करती हैं कि कानून अपना काम कर रहा है।