ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप बिस्वास का समर्थन किया, टीएमसी के 675 करोड़ रुपये वाले बैंक खाते को फ्रीज करने की मांग का किया समर्थन
ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप बिस्वास का समर्थन किया, टीएमसी के 675 करोड़ रुपये वाले बैंक खाते को फ्रीज करने की मांग का किया समर्थन
NewsPoint•
कोलकाता से खबर है कि ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप बिस्वास का समर्थन किया है। बिस्वास ने एक बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के खाते फ्रीज करने की मांग की है। बनर्जी ने कहा कि खाते में गलत पैसा हो सकता है। यह कदम पार्टी में नेतृत्व विवाद के बीच आया है।
कोलकाता, 18 जून। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास के उस कदम का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने एक प्राइवेट बैंक से पार्टी का बैंक अकाउंट फ्रीज करने की मांग की थी। बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर कहा था कि पार्टी के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के कारण यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि कौन अकाउंट चलाने के लिए अधिकृत है। इस बीच, एक राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि ऋतब्रत बनर्जी अपने गुट को 'असली' टीएमसी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर तब जब पार्टी के लगभग 58 विधायकों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी है।
अरूप बिस्वास ने एक प्राइवेट बैंक को लिखे पत्र में कहा कि पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट खुद को असली टीएमसी बता रहे हैं। इस वजह से यह भ्रम पैदा हो गया है कि पार्टी का बैंक अकाउंट चलाने के लिए कौन अधिकृत है। उन्होंने बैंक से अनुरोध किया कि वे पैसे निकालने पर रोक लगाएं और अकाउंट में यथास्थिति बनाए रखें, जब तक कि पार्टी के नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद सुलझ नहीं जाता। बिस्वास ने बैंक से यह भी कहा कि वे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा पैसे निकालने या अन्य लेन-देन को रोकें। साथ ही, पहले से साइन किए गए चेक के गलत इस्तेमाल से बचाव के उपाय भी करें।विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में कहा, “अरूप बिस्वास के पत्र में दम है। क्या गारंटी है कि इस अकाउंट में चोरी का या गबन किया हुआ पैसा नहीं है? मैं तृणमूल का अकाउंट फ्रीज करने की मांग का समर्थन करता हूं।”
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद 5 जून को टीएमसी ने संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा की थी। इस फेरबदल में अरूप बिस्वास की जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, बैंक को भेजे अपने पत्र में बिस्वास ने दावा किया कि वे अभी भी पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं।
तृणमूल कांग्रेस का एक प्राइवेट बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में अकाउंट है। पार्टी द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इस अकाउंट में 675 करोड़ रुपए जमा हैं। बिस्वास के पत्र पर 12 जून की तारीख थी, लेकिन बैंक को यह 16 जून को मिला।
राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी अपने गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह तब हो रहा है जब पार्टी नेतृत्व के खिलाफ लगभग 58 विधायकों ने बगावत कर दी है। यह स्थिति पार्टी के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों को दर्शाती है।
अरूप बिस्वास ने बैंक को लिखे पत्र में इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि बैंक अकाउंट का संचालन कौन कर सकता है। उन्होंने कहा कि विरोधी गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस का असली प्रतिनिधि बता रहे हैं। इससे यह भ्रम पैदा हो रहा है कि पार्टी का बैंक अकाउंट चलाने के लिए कौन अधिकृत है। उन्होंने बैंक से आग्रह किया कि वे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा पैसे निकालने या अन्य लेन-देन को रोकें। साथ ही, पहले से साइन किए गए चेक के गलत इस्तेमाल से बचाव के उपाय भी करें।
यह मामला पार्टी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष और वित्तीय प्रबंधन को लेकर चिंताएं पैदा करता है। चुनाव के बाद हुए संगठनात्मक फेरबदल और उसके बाद कोषाध्यक्ष के पद को लेकर चल रहा विवाद इस बात का संकेत है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अरूप बिस्वास का यह कदम पार्टी के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।