अनंदिबेन पटेल का संदेश: राम का जीवन और भारत की आत्मा के आलोक में दीपोत्सव समारोह
अनंदिबेन पटेल का संदेश: राम का जीवन और भारत की आत्मा के आलोक में दीपोत्सव समारोह
NewsPoint•
अयोध्या में 7 नवंबर को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीपोत्सव समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि "राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार, एक संस्कार और भारत की आत्मा हैं।" उन्होंने राम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश साझा किए। अयोध्या में रामकथा पार्क में आयोजित इस 10वें दीपोत्सव समारोह में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी। यहां पर प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का प्रतीकात्मक रूप से स्वागत किया गया। राज्यपाल ने रामराज्य की परिकल्पना को केवल शासन व्यवस्था का आदर्श ही नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और लोक कल्याण की बात भी कही।
राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा कि अयोध्या आज करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बन गई है। "यहां की मिट्टी में रामत्व का भाव समाहित है।" दीपोत्सव समारोह में 'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना को साकार किया गया। इस खास मौके पर प्रभु राम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल एक शासन प्रणाली का सपना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा समाज स्थापित करने का संकल्प है जहां न्याय, समानता और संवेदना हो।राज्यपाल ने महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि "उनके महाकाव्यों ने श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया।" यही कारण है कि आज श्रीराम भारत की सांस्कृतिक एकता के आधार बने हुए हैं।
आनंदीबेन पटेल ने आगे यह भी बताया कि अयोध्या अपनी प्राचीन पहचान को आधुनिक विकास से जोड़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से यहाँ रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। अयोध्या की रामलीला, लोककला और पारंपरिक खानपान को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। राज्यपाल ने समारोह के दौरान सरयू नदी की निर्मलता और अयोध्या के पर्यावरण को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया।
उन्होंने आम लोगों से स्वच्छता, जल संरक्षण और वृक्षारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि "दीपोत्सव की सार्थकता तभी है, जब हमारे दीपों का प्रकाश प्रकृति के संरक्षण और समाज के कल्याण का भी माध्यम बने।" उन्होंने यह भी कहा कि "प्रभु श्रीराम ने सिखाया है कि समाज में कोई भी व्यक्ति उपेक्षित नहीं होना चाहिए।"
राज्यपाल ने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुख और सम्मान लाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि "बीते 10-12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।"
आनंदीबेन पटेल ने बदलते भारत की तस्वीर पेश करते हुए बताया कि "कुछ समय पहले हमें अंतरिक्ष तकनीक और हथियारों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज चंद्रयान-3 की सफलता और 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के चलते, हमने अपनी वैज्ञानिक क्षमता को साबित कर दिया है।"
उन्होंने यह भी बताया कि आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ती है। "यह 140 करोड़ देशवासियों के नए आत्मविश्वास का प्रतीक है।"
राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को बताते हुए यह कहा कि "हमारा एक दीप सिखाता है कि स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन को प्रकाशित किया जा सकता है।" उन्होंने युवाओं से भगवान श्रीराम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह को यह संकल्प दिलाया कि "हम किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप बुझने नहीं देंगे। किसी बेटी के सपनों को सीमित नहीं होने देंगे। किसी बुजुर्ग को अकेला नहीं छोड़ेंगे और समाज में प्रेम व समरसता को मजबूत बनाएंगे।"
राज्यपाल ने कहा कि "अपनी खुशियों की रोशनी से दूसरों के जीवन में आशा का संचार करना ही दीपावली का वास्तविक संदेश है।" यह कार्यक्रम केवल दीपोत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर चलने और सहयोग करने की प्रेरणा देना है।