सोनिया गांधी ने द गार्जियन से साक्षात्कार में परिवार और राजनीति के अनुभव साझा किए

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस) - कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के कई अनुभव साझा किए। इस साक्षात्कार में उन्होंने गांधी परिवार के नेतृत्व और कांग्रेस में वंशवाद के आरोपों पर सवाल पूछने से बचने की कोशिश की। उनका कहना था कि इस बारे में सवाल पार्टी से पूछना चाहिए। इस साक्षात्कार के साथ उनकी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का एक अंश भी प्रकाशित हुआ है, जो अगले सप्ताह रिलीज होगी।

सोनिया गांधी ने बताया कि जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस गांधी परिवार के नेतृत्व से खुद को अलग क्यों नहीं कर पा रही है, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, "आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए।" इसी तरह, जब वंशवाद के आरोपों पर उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "हम सभी चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और हारते हैं। हम सभी के साथ ऐसा हुआ है।" इस दौरान उन्होंने कांग्रेस द्वारा देश की राजनीति में क्या स्थान रखा है, इस पर भी अपनी राय दी।
साक्षात्कार में यह भी चर्चा की गई कि क्या कांग्रेस अब भी भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प बन सकती है। सोनिया ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस ऐसा कर सकती है। हालांकि, कई लोग इस बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए विवादों पर भी प्रतिक्रियाएं दीं। उनका कहना था कि "लगभग हर मामले में मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था।"

साक्षात्कार में गांधी परिवार के लगातार गिरते राजनीतिक प्रभाव का भी जिक्र किया गया। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी की तीन बार लोकसभा चुनावों में हार को ध्यान में रखते हुए, यह सवाल उठाया गया कि क्या कांग्रेस अब केवल कुछ राज्यों तक सीमित रह गई है। भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति अब देश में प्रमुख विचारधारा बन गई है।

सोनिया गांधी ने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर भी बात की। उन्होंने इसे एक गलती करार दिया और कहा कि उनके मुताबिक इंदिरा गांधी को इस फैसले का बाद में एहसास हुआ था। उन्होंने ये भी कहा, "मैं यह जानती हूं कि कई लोग इस पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वे आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते से सहज नहीं थीं।"

साक्षात्कार में एक बेहद गंभीर मुद्दे का जिक्र किया गया। यह उनकी सास इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ा था। सोनिया ने उस दिन को याद किया जब वह इंदिरा जी को अस्पताल ले गई थीं। उन्होंने वर्णन किया कि कैसे उस दिन गोलियों की आवाज को उन्होंने आतिशबाजी की आवाज जैसा महसूस किया। इसके आलावा उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने के दौरान इंदिरा जी के खून से लथपथ शरीर को लेकर उन्हें कितना दर्द हुआ था।

सोनिया ने कहा, "चारों तरफ खून था और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं। ऐसा लग रहा था कि वह पहले ही जा चुकी हैं।" यह सफर उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। सड़क पर यातायात कम होने के बावजूद, उन्हें रास्ता बहुत लंबा लग रहा था। इस दौरान उन्हें यह भान हो गया था कि इंदिरा गांधी शायद अब जीवित नहीं हैं।

राजीव गांधी की हत्या के बाद के समय को भी सोनिया ने याद किया। उस समय उन्होंने अपने जीवन के मानसिक संघर्षों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वह गहरे सदमे और अवसाद में थीं और खुद को एक भूत की तरह महसूस करती थीं। यह संजीदा अनुभव उनके जीवन का एक कठिन दौर था।

सोनिया गांधी के अनुसार, राजीव गांधी की हत्या के बाद उन्होंने अपने दुख को चुपचाप स्वीकार किया। उनके लिए ये सब बातें बहुत ही भारी थीं। इस साक्षात्कार से यह स्पष्ट होता है कि सोनिया गांधी अपने परिवार के विवादों और राजनीतिक चुनौतियों दोनों को अच्छी तरह समझती हैं।

साक्षात्कार में उभरे मुद्दे कांग्रेस के भविष्य और गांधी परिवार की भूमिका को लेकर हैं। हालांकि, सोनिया ने कहा कि कांग्रेस अभी भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पार्टी के कार्यकर्ताओं में उन मुद्दों पर चिंता भी पाई गई है जिनका सामना गांधी परिवार कर रहा है।

सोनिया गांधी का यह साक्षात्कार इस बात का संकेत है कि कांग्रेस अपने पुराना राजनीतिक महत्व ढूंढने में लगी है। लेकिन उन पर लगे वंशवाद के आरोप अभी भी एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय हैं।

उनकी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' में भी उनके जीवन के कई जटिल और संवेदनशील अनुभवों का जिक्र किया गया है। यह पुस्तक समाज और राजनीति में उनकी भूमिका को और समर्पण को दर्शाती है।

सोनिया गांधी का यह अनुभव पढ़ने के लिए बहुत ही दिलचस्प है। यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि देश की राजनीति की भी है। उनकी कथाएं हमें यह भी बताती हैं कि जीवन में कठिनाइयों का सामना करना कितना मुश्किल होता है।

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