उत्तर प्रदेश में शिवसेना नेता शायना एनसी और सपा विधायक तूफानी सरोज के बीच राजनीतिक बयानों का युद्ध
उत्तर प्रदेश में शिवसेना नेता शायना एनसी और सपा विधायक तूफानी सरोज के बीच राजनीतिक बयानों का युद्ध
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नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त बयानबाजी चल रही है। यह सब कानून व्यवस्था, परिवारवाद, तुष्टिकरण और राहुल गांधी के बारे में हो रहा है। शिवसेना की नेता शायना एनसी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति कर रहा है। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने और विदेशी टूलकिट की तरह काम करने के आरोप लगाए, जिसका शायना ने समर्थन किया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के विधायक तूफानी सरोज ने भाजपा को परिवारवाद और खराब कानून-व्यवस्था के लिए निशाना बनाया।
शायना एनसी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि वे सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। उनका कहना था, "ये नेता भगवान राम को याद नहीं करते, लेकिन अयोध्या को लेकर टिप्पणी जरूर करते हैं।" उन्होंने दिवाली के समय अयोध्या में दीपोत्सव का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष का कोई नेता ऐसा कहता है कि वो अयोध्या जाकर दिवाली मनाएगा? शायना ने साफ कहा कि जो लोग केवल वोट बैंक के लिए राजनीति करते हैं, उन्हें जनता आगामी चुनावों में जवाब देगी।शायना ने नितिन नवीन द्वारा राहुल गांधी पर किए गए आरोपों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "जो लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग को प्रोत्साहित करते हैं, भारत माता की जय बोलने में झिझकते हैं और वंदे मातरम् गाने से बचते हैं, उनके विचारों पर क्या टिप्पणी की जाए।" उनका कहना था कि ऐसे लोग भारत का अपमान करते हैं और उनकी मंशा अस्थिरता पैदा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को विकास और स्थिरता की दिशा में बढ़ना चाहिए, ना कि अस्थिरता की ओर।
बाबरी मस्जिद विध्वंस पर सोनिया गांधी की टिप्पणी पर भी शायना ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "अच्छा है कि सोनिया गांधी ने कुछ आत्ममंथन किया है और उन्हें आपातकाल के दौरान की गई गलतियां दिखाई देने लगी हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह वक्त तानाशाही थी, ना कि लोकतंत्र। शायना ने राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि अब यह आस्था का विषय है, राजनीति का नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि गलतियों को स्वीकार करना सुधार के लिए पहला कदम होता है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के विधायक तूफानी सरोज ने भाजपा के नितिन नवीन पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा खुद परिवारवाद को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा, "भाजपा से ज्यादा परिवारवाद कौन करता है?" सरोज ने राजनाथ सिंह और अमित शाह के परिवारों का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा में परिवारवाद सबसे ज्यादा है। सपा विधायक ने नितिन नवीन के आरोपों का पलटवार करते हुए कहा, "आजम खान अपराधियों के शागिर्द दिखाई देते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी पर भी नजर डालनी चाहिए।"
सरोज ने एक चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख्यालय पर लगा दी जाए। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि किन अपराधियों के संबंध किस राजनीतिक दल से हैं। उन्होंने योगी सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जंगलराज जैसी स्थिति पैदा हो गई है। भाजपा विधायकों की ओर से भी कई शिकायतें सामने आई हैं।
तूफानी सरोज ने महिलाओं के खिलाफ अपराध, दुष्कर्म की घटनाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जीरो टॉलरेंस का नारा दिया था, लेकिन लगता है कि सरकार इस नारे का वास्तविक अर्थ ही नहीं समझ पाई है। उनके मुताबिक, भाजपा के शासनकाल में अपराधों में वृद्धि हुई है और सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर नाकाम रही है।
इस तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का यह दौर अब और भी गर्म होता जा रहा है। विपक्ष और सत्तारूढ़ पार्टी दोनों एक-दूसरे को आक्रामक तरीके से निशाना बना रहे हैं। यह बयानबाजी सिर्फ राजनीतिक हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की भावनाओं और मुद्दों से भी जुड़ी हुई है। हर पार्टी अपने दल को सही ठहराने के लिए कारणों का सहारा ले रही है।
इस पूरे मामले में एक बात साफ है - उत्तर प्रदेश की राजनीति में रडार पर ज्यादातर मुद्दे हैं और हर पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। चुनावों को देखते हुए यह संघर्ष और भी तेज होता जा सकता है। जनता के ध्यान में आने वाले ये मुद्दे आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं। अब देखना है कि किस पार्टी के दावे सच साबित होते हैं और कौन सी पार्टी चुनावी मैदान में सफल होती है।