भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की टिप्पणी पर कांग्रेस सपा के नेताओं का आरोप प्रत्यारोप, परिवारवाद पर उठे सवाल
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की टिप्पणी पर कांग्रेस-सपा के नेताओं का आरोप-प्रत्यारोप, परिवारवाद पर उठे सवाल
NewsPoint•
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टिप्पणियों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नितिन नवीन ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को लेकर टिप्पणी की। भाजपा नेताओं ने उनके इस बयान का समर्थन किया और सपा एवं कांग्रेस पर परिवारवाद, तुष्टिकरण की राजनीति और माफिया संरक्षण के आरोप लगाए। दूसरी ओर, सपा और कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि ये टिप्पणियाँ विरोधियों की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान होने का नतीजा हैं।
मुंबई में शिवसेना नेता शाइना एनसी ने विपक्षी नेताओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "विपक्ष के नेताओं को भगवान राम याद नहीं आते, लेकिन वे अयोध्या को लेकर टिप्पणियां जरूर करते हैं।" उन्होंने दिवाली के मौके पर दीपोत्सव का जिक्र किया और पूछा, "क्या अखिलेश यादव ने कभी कहा कि वह अयोध्या जाकर सभी के साथ दिवाली मनाएंगे?" शाइना ने यह भी कहा कि जनहित के खिलाफ वोट बैंक की राजनीति करने वालों को जनता उचित जवाब देगी।उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने नितिन नवीन के बयान पर कहा, "पूरी दुनिया जानती है कि अखिलेश यादव गुंडों और माफिया को पालते हैं।" भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने नितिन नवीन की टिप्पणियों को सही ठहराते हुए कहा कि, "अखिलेश यादव और राहुल गांधी अपने परिवार से आगे नहीं सोचते। उनकी राजनीति परिवार तक सीमित है।" उन्होंने जोड़ा कि, "अखिलेश यादव ने सनातन के बारे में बोलना शुरू किया था और अब वो टोपी पहनना भी बंद कर चुके हैं। लेकिन लोगों को उनकी असलियत पता है।"
लखनऊ में मंत्री संजय निषाद ने नितिन नवीन के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि देश में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया गया होता, तो स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रहना पड़ता। उन्होंने उन लोगों का जिक्र किया जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में जान दी, लेकिन आज भी उन्हें उनका उचित अधिकार नहीं मिल पाया है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने नितिन नवीन की टिप्पणी को शत-प्रतिशत सही बताया और समाजवादी पार्टी पर माफिया से संबंधों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे माफिया सपा के साथ रहे हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़े माफिया नेताओं के साथ घूमते थे और उनके मंचों से माफिया के करीबियों के साथ तस्वीरें भी देखने को मिलती थीं।
वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का विरोध किया। लखनऊ में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने राहुल गांधी और उनके परिवार के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "इस परिवार की स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में भूमिका रही है।" उन्होंने पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि, "इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए 32 गोलियां खाईं। राजीव गांधी ने भी देश की एकता के लिए बलिदान दिया।"
अयोध्या में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वसनीयता से भाजपा के नेता परेशान हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हथकंडों का 2027 के चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सिद्धार्थनगर में भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने नितिन नवीन की टिप्पणी को सही बताया। उन्होंने कहा, "सपा और कांग्रेस में परिवार के सदस्यों का ही नेतृत्व है।" उन्होंने यह तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा गांधी और सोनिया गांधी हैं, जबकि सपा में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव और रामगोपाल यादव प्रमुख हैं।
दूसरी ओर, बेंगलुरु में कांग्रेस एमएलसी रमेश बाबू ने नितिन नवीन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने ही विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं और इसी निराशा में राहुल गांधी के बारे में बयान दे रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि लोग एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता उदित राज ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वो अराजकता फैलाकर ध्यान भटका रही है। उन्होंने कहा, "सरकार का काम काम करना है, लेकिन वो प्रदर्शन कर रही है।" उन्होंने सवाल किया कि, "क्या सत्ता में बैठी पार्टी प्रदर्शन करती है?"
मुंबई में भाजपा विधायक आर. तमिल सेल्वन ने नितिन नवीन की टिप्पणियों का समर्थन किया। उन्होंने उन्हें भाजपा का सम्मानित नेता बताकर कहा कि उनकी बातें सही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर विदेशी फंडिंग पर निर्भर रहने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, "कांग्रेस अब खत्म होने की ओर है।"
इसका नतीजा यह है कि राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। सभी दल एक-दूसरे पर तंज कस रहे हैं। सतही तौर पर ये बयानों की लड़ाई लगती है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा छिपा हुआ है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि जनता किसी भी पार्टी को किस हद तक स्वीकार करती है और आने वाले चुनावों में उनका फैसला क्या होगा।