निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर असम के नेल्ली नरसंहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए

NewsPoint•
Navbharat Times
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर तीखा हमला किया है। दुबे ने यह हमला विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच किया। उन्होंने राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर कुछ पुराने दस्तावेज साझा किए। दुबे ने कहा कि 1983 में असम में नेल्ली नरसंहार हुआ, जिसमें लगभग 5000 बांग्लादेशी मुसलमान मारे गए थे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते उस समय जबरदस्ती चुनाव कराया, जो असम में दंगों का कारण बना।

दुबे ने ये बातें तब कही जब राहुल गांधी एसआईआर के खिलाफ चुनाव आयोग में अभियान चला रहे हैं। दुबे ने कहा, “राहुल गांधी उसी बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश को गुमराह कर गृह युद्ध कराना चाहते हैं।” इससे पहले, उन्होंने 1 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू पर भी निशाना साधा था। दुबे ने उल्लेख किया कि 1952 में चीन ने पहली बार भारत के अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया था।
उन्होंने कहा कि चूंकि नेहरू अपनी खामियों को छिपाने के लिए देश को गुमराह कर रहे थे, इसलिए 1952 में भारतीय सेना ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया था। मेजर जनरल राजेन्द्र नाथ को इस पर जांच करने के लिए भेजा गया था। दुबे ने कहा कि इस रिपोर्ट को देखकर नेहरू आगबबूला हो गए थे और उन्होंने इसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। असल में, उन्होंने चीन को तिब्बत का हिस्सा माना और पंचशील का सिद्धांत बनाया।

दुबे ने आगे कहा, “भारत में चुनाव भारत के मतदाताओं से होगा, बांग्लादेशी या पाकिस्तानी वोटर से नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि जिस चीन के पास 1955 तक अपना हवाई जहाज नहीं था, उसे 1962 के युद्ध में 38 हजार स्क्वायर किलोमीटर जमीन खोने की स्थिति में जाना पड़ा। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या इसे देशद्रोह माना जाना चाहिए?

ये सभी बातें तब हो रही हैं जब एसआईआर प्रक्रिया पर राजनीति गर्माई हुई है। दुबे ने नेहरू की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि इन नीतियों ने देश की सुरक्षा को कमजोर किया। लोगों का ध्यान इस ओर खींचते हुए संकेत दिया कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति में भी कुछ वही बातें हो रही हैं।

उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि राजनीति के चलते देश की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा। दुबे ने पिछले इतिहास का उदाहरण देकर ये बताने की कोशिश की कि किस प्रकार के निर्णयों से भविष्य प्रभावित हो सकता है। उनके शब्दों से स्पष्ट होता है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता है और राजनीति के हानिकारक प्रभावों पर ध्यान देना जरूरी है।

इस प्रकार, यह मुद्दा न केवल वर्तमान राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे ऐतिहासिक निर्णयों के चलते मौजूदा स्थिति पर भी एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता को दर्शाता है।

रेकमेंडेड खबरें