अमेरिका का सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग: मार्को रुबियो का बयान और यमनी संघर्ष पर प्रतिक्रिया
अमेरिका का सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग: मार्को रुबियो का बयान और यमनी संघर्ष पर प्रतिक्रिया
NewsPoint•
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 6 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि सऊदी अरब समर्थित यमनी सेनाएं हूती विद्रोहियों के हमलों का जवाब दे रही हैं। इस समय अमेरिका सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा और सुरक्षा समझौतों को निभाने के लिए तैयार है। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि अमेरिका इस संघर्ष में हवाई सैन्य सहायता प्रदान करेगा या नहीं। रुबियो ने यह बयान वॉशिंगटन में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान दिया, जब वह यूरोप जाने की तैयारी कर रहे थे।
रुबियो ने बताया कि सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों द्वारा हमला किया गया है और उन्हें अपनी रक्षा करने का अधिकार है। यह संघर्ष एक रणनीतिक जलडमरूमध्य के आसपास के इलाके में हो रहा है, जिसके महत्व को समझते हुए सऊदी और यमनी सेनाएं परिस्थिति के जवाब में कार्रवाई कर रही हैं। राष्ट्रपति रुबियो ने कहा, “सऊदी अरब और यमनी सेनाएं साफ तौर पर नहीं चाहतीं कि हूती विद्रोही उस जलडमरूम whereabouts पर कब्जा बनाए रखें।” जब उनसे यमनी सेनाओं द्वारा चलाए गए अभियानों के बारे में पूछा गया, तो रुबियो ने कहा कि यह प्रगति उन इलाकों को वापस लेने के लिए की जा रही है, जिन पर पहले हूती विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया था। उन्होंने यह भी कहा, "हमें उम्मीद थी कि ऐसा होगा और अब वही हो रहा है।"
रुबियो ने यह भी बताया कि हूती विद्रोही समुद्री क्षेत्रों में व्यापारी और सैन्य जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इस कारण सऊदी अरब इन इलाकों को खाली करवाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों द्वारा उत्पन्न खतरे को देखते हुए सऊदी अरब को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है।
वहीं, यमन में संघर्ष ने कई सालों से विकराल रूप ले लिया है। इस संघर्ष में हूती विद्रोही, यमनी सरकार और क्षेत्रीय ताकतें शामिल हैं। हूती समूह ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद से सऊदी अरब ने 2015 में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। रुबियो की बातों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध हैं, जिससे वे आपसी सुरक्षा खतरों का सामना कर सकते हैं।
इसके अलावा, रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग, हथियारों की बिक्री, सैन्य ट्रेनिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल शामिल हैं। यमन की स्थिति न केवल इलाके की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा मुद्दा है।
अंत में, रुबियो ने अपने बयान में न केवल सैन्य रणनीतियों पर चर्चा की, बल्कि इस विवाद के पीछे के राजनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को भी उजागर किया, जिससे यह सिद्ध होता है कि इस संघर्ष का असर केवल यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है। उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा, चाहे स्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो।
यही कारण है कि सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का हमला, न केवल क्षेत्र की लड़ाई को दर्शाता है, बल्कि यह दुनिया भर में सुरक्षा के प्रति चिंताओं को भी बढ़ाता है। अमेरिका की भूमिका और उसके फैसले, इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।