पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, हाईकोर्ट का आदेश

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Navbharat Times
पंजाब में सरकारी अधिकारियों के तबादले और तैनाती में भ्रष्टाचार के आरोपों ने सियासी हलचल मचा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया। अब, आम आदमी पार्टी (आप) सरकार इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा रखती है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच तुरंत शुरू करे और दो महीने के अंदर प्रगति रिपोर्ट पेश करें। यह याचिका अधिवक्ता निखिल सराफ ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों के तबादले और तैनाती के लिए रिश्वत का नेटवर्क काम कर रहा है।

अधिवक्ता निखिल सराफ की याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंजाब के आला अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। याचिका में कहा गया है कि महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने के लिए अधिकारियों को मोटी रकम देकर रिश्वत दी जा रही है। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को भी प्रभावित किया जा रहा है। सराफ ने यह भी बताया कि निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों और भूमि विकासकर्ताओं को टेंडर, अनुमति और लाइसेंस देने के बदले अवैध रूप से धन लिया जा रहा है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला कर चुकी है। उन्होंने बताया कि "नवंबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंजाब में जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।" इसी आधार पर उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की अगुआई में इस मामले पर अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने सीबीआई को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने जांच में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भी उल्लेख किया।

अभी सभी की नजरें इस मामले में लीगल प्रक्रिया पर हैं। जहां एक ओर सीबीआई जांच का रास्ता खुला है, वहीं दूसरी ओर पंजाब सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला इस मामले को और जटिल बना सकता है। इससे स्पष्ट है कि आरोप गंभीर हैं और इसकी जांच करना बेहद जरूरी है। यह जांच न केवल पंजाब के प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित कर सकती है, बल्कि इससे राजनीतिक परिदृश्य भी बदल सकता है।

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार को कोर्ट से राहत मिलती है, तो शायद जांच में कुछ बदलाव हो सकता है। लेकिन यदि कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, तो सीबीआई अपने काम में जुट जाएगी।

फिलहाल, यह मामला पंजाब में सियासी हलचलों को जारी रखेगा। पंजाब सरकार की अगुवाई करने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। इससे पहले भी पंजाब में कई विवाद उठ चुके हैं, लेकिन यह जांच उन सभी मामलों में एक नई बुनियाद रखने की क्षमता रखती है। अब देखना यह है कि इस मामले का अगला मोड़ क्या होता है।