आयुष मंत्रालय का योग 365 अभियान: प्रार्थना से शुरू करें योगाभ्यास और पाएं अधिक लाभ
आयुष मंत्रालय का योग 365 अभियान: प्रार्थना से शुरू करें योगाभ्यास और पाएं अधिक लाभ
NewsPoint•
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने की एक पूरी प्रक्रिया है। आयुष मंत्रालय ने बताया है कि असली लाभ तभी मिलता है, जब योग की शुरुआत एक सही मानसिकता और सकारात्मक सोच के साथ की जाए। इसलिए, योग की शुरुआत प्रार्थना से करना बहुत जरूरी है। प्रार्थना मन को शांत करने का एक सबसे सरल तरीक़ा है। जब हम प्रार्थना करते हैं, तो हमारे मन में बिखरे हुए विचार एक जगह केंद्रित होते हैं। इससे मन की चंचलता कम होती है और हम वर्तमान में लौटते हैं।
प्रार्थना के दौरान गहरी सांसें लेना शरीर को योगाभ्यास के लिए तैयार करता है। 'योग 365' अभियान के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि लोग अपनी योग मैट बिछाएं, प्रार्थना से दिन की शुरुआत करें और ध्यान और कृतज्ञता के साथ उत्तरदायी तरीके से अभ्यास करें। योग 365 का उद्देश्य यह है कि योग को एक दिन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसका हिस्सा हर दिन की दिनचर्या में शामिल किया जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रार्थना से शुरू किया गया योग अभ्यास और भी ध्यानपूर्ण होता है। जब हम कुछ समय के लिए रुकते हैं, गहरी सांस लेते हैं और सकारात्मक मनसा बनाते हैं, तो हमारा मन और शरीर दोनों अभ्यास के लिए संपूर्ण रूप से तैयार हो जाते हैं। यह छोटा सा ठहराव हमें दिनभर की भागदौड़ से दूर ले जाता है और योग के प्रति सही समर्पण में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे योग में जल्दबाजी न करें। सबसे पहले प्रार्थना करें, मन को शांत करें और एक सकारात्मक संकल्प लें। फिर आराम से योगाभ्यास में जुटें। प्रार्थना के साथ की गई यह शुरुआत ही ध्यानपूर्ण योग का सही माहौल बनाती है। यह पूरा अभ्यास अधिक प्रभावी और सार्थक बना देती है। इस दृष्टिकोण से योग का अभ्यास न केवल शारीरिक फायदा पहुंचाता है, बल्कि मन और आत्मा की भी शांति लाता है।