ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा की राज्यसभा रणनीति की सराहना की, अखिलेश यादव पर तंज कसा

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Navbharat Times
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा के राज्यसभा के आठ उम्मीदवारों के नामांकन की सराहना की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता अखिलेश यादव की राज्यसभा रणनीति पर सवाल उठाए और कहा कि उनके बड़े दावे चुनावी मैदान में असफल हो गए। राजभर ने दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा की नीति को सामाजिक प्रतिनिधित्व का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों से प्रतिनिधियों को चुना है।

राजभर ने कहा कि भाजपा ने राज्यसभा के लिए जो नाम घोषित किए हैं, उन सभी में अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में जिन वर्गों का उल्लेख किया था, भाजपा ने उन सभी का ध्यान रखा है। जैसे कि पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अनुसूचित वर्ग से लोगों को राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया गया है। राजभर ने बताया कि भाजपा में ऐसे लोगों को भी मौका मिलता है, जिनकी पहले कल्पना करना मुश्किल होता था कि वे देश की सर्वोच्च विधायी संस्थाओं तक पहुंचेंगे। उन्होंने पाल समाज का उदाहरण देकर बताया कि ऐसे वर्ग के व्यक्ति को भी राज्यसभा जाने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा, "भाजपा की यही सामाजिक प्रतिनिधित्व की नीति उसे अन्य दलों से अलग करती है।" वहीं, अखिलेश यादव के उस दावे पर कि Samajwadi Party का तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार ऐसा होगा जिससे भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी, राजभर ने कहा, "अखिलेश यादव के दावे आज फ्लॉप हो गए।" उन्होंने कहा कि Samajwadi Party में परिवार और धन को प्राथमिकता दी गई है। यहाँ उनका इशारा रामगोपाल यादव और धनीराम की तरफ था, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने जिस बड़े राजनीतिक मुकाबले की बात की, वह भाजपा के उम्मीदवारों के सामने प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि Samajwadi Party भाजपा के इशारों पर काम कर रही है। उन्होंने भी सुझाव दिया कि अखिलेश यादव को भाजपा से सीखना चाहिए कि पार्टी कैसे अलग-अलग सामाजिक वर्गों को राजनीतिक अवसर देती है।

उन्होंने नाई, प्रजापति, पाल, कुम्हार, लोहार और मुस्लिम समाज का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास कर रही है। हालांकि, अखिलेश यादव के राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार पर लगातार बड़े दावों का कोई असर नहीं हुआ। राजभर ने कहा कि "Samajwadi Party के कार्यकर्ता केवल दरी बिछाते रह जाएंगे और नारे लगाते रहेंगे, जबकि उन्हें राजनीतिक रूप से कुछ हासिल नहीं होगा।"

अखिलेश यादव की 403 विधानसभा सीटों पर नजर रखने की बात पर राजभर ने कहा कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनाने का दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि "उत्तर प्रदेश में भाजपा दो-तिहाई से भी अधिक सीटों के साथ सरकार बनाएगी।" राजभर ने मजाक करते हुए कहा कि "भाजपा की सरकार बनवाने की जिम्मेदारी भी अखिलेश यादव की ही होगी।"

दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन पर राजभर ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनाव परिणामों के आंकड़ों पर विचार करना चाहिए। राजभर ने कहा कि "2014 से पहले कांग्रेस की पूरे देश में सरकार थी और उस समय देश की व्यवस्था उसके नियंत्रण में थी।" उन्होंने कहा कि अगर चुनाव में गंभीर गड़बड़ी होती, तो 2019 में भाजपा को 303 सीटें मिलती और 2024 में उसकी सीटें घटकर 240 पर नहीं आतीं।

राजभर ने दावा किया कि यदि चुनाव में धांधली होती, तो भाजपा की सीटें बढ़नी चाहिए थीं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, बधाई की संख्या कम हुई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों का उल्लेख करते हुए कहा कि "अगर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी होती, तो Samajwadi Party कैसे 37 और कांग्रेस छह सीटें जीतती?"

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद कभी चुनाव आयोग और कभी ईवीएम को जिम्मेदार ठहराता है। उन्होंने सवाल उठाया कि "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष अब सवाल क्यों उठा रहा है और इससे पहले क्यों नहीं उठाया गया?"

राजभर की बातों से साफ है कि भाजपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की नीति उन्हें अन्य राजनीतिक दलों से अलग करती है। उन्होंने विपक्ष को ये याद दिलाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। भाजपा का संकल्प है कि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, और राजभर ने इस बात को सही ठहराते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसा चुनावी प्रणाली में होना चाहिए।

राजभर की ये टिप्पणियाँ निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण हैं। उनके बयान यह दर्शाते हैं कि कैसे भाजपा विभिन्न सामाजिक वर्गों को जोड़कर अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसलिए अब यह देखना होगा कि क्या विपक्ष इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देता है या नहीं।

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