दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया, 90 वेंडरों को संरक्षण

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दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के एक हिस्से को छोड़कर पूरे इलाके को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया है। कोर्ट ने शनिवार, 6 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया, जिसमें 90 वेंडरों को तब तक काम करने की अनुमति दी गई, जब तक कि टाउन वेंडिंग कमेटी-II उनके अधिकारों पर फैसला नहीं ले लेती। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने यह निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए, जिनमें वेंडिंग और हॉकिंग गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए थे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि "याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों द्वारा रिकॉर्ड पर रखी गई 26 सितंबर की तस्वीरों से कोई शक नहीं रह जाता कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को 'नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन' घोषित करने के फैसले की पुष्टि की जानी चाहिए।" कोर्ट ने इस फैसले में 'स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम 2014' और हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ध्यान रखा है। इसके तहत, वेंडरों को हटाने के लिए उचित विकल्प देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
बेंच ने यह भी कहा कि, "अगर स्ट्रीट वेंडर 'नो-वेंडिंग जोन' में वेंडिंग कर रहे हैं, तो एमसीडी या संबंधित अथॉरिटी का यह कर्तव्य है कि वे उन्हें 'नो-वेंडिंग जोन' से 'वेंडिंग जोन' में जाने में मदद करें, ताकि स्ट्रीट वेंडरों को काम करने लायक विकल्प मिल सके और वे अपनी आजीविका कमा सकें।" कोर्ट ने बताया कि 9 अप्रैल, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वेंडरों को हटाने का काम सावधानी, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए और अधिकारियों को उन्हें तय 'वेंडिंग जोन' में शिफ्ट होने में सक्रिय रूप से मदद करनी चाहिए।

हाईकोर्ट के अनुसार, नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में वर्तमान में 400 से अधिक वेंडर काम कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वेंडर अनधिकृत हैं। बेंच ने 90 वेंडरों को पहचान किया है, जिन्हें आवश्यक संरक्षण या मान्यता प्राप्त है। जस्टिस सिंह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि "जहां तक नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर इलाके की बात है, तो ऊपर 'एक्स' के तौर पर चिह्नित हिस्से को छोड़कर, पूरे नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को 'नो-हॉकिंग जोन और नो-वेंडिंग जोन' घोषित किया जाता है।"

कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया है कि 12 अक्टूबर के बाद सभी अनधिकृत वेंडरों को उस इलाके से हटाने के लिए स्वतंत्र होगा। इसके अलावा, दिल्ली फायर सर्विस को भी कहा गया है कि अनधिकृत वेंडरों को हटाने के बाद वे नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर का निरीक्षण करें और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें। दिल्ली पुलिस को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि फैसले का पालन किया जाए और एमसीडी और डीडीए का सहयोग किया जाए।

कोर्ट ने मामले को 30 नवंबर को सूचीबद्ध किया है, जब वह दिल्ली फायर सर्विस की अनुपालन रिपोर्ट पर विचार करेगा। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब कई याचिकाएँ दायर की गईं थीं जो वेंडरों के अधिकारों और इलाके में अवैध वेंडिंग गतिविधियों पर केंद्रित थीं। अब देखना होगा कि इन निर्देशों के अनुसार वेंडरों की स्थिति में क्या बदलाव आता है।

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