केन बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड की तकदीर बदलेगी, सीएम मोहन यादव ने किसानों के नवाचारों की सराहना की
केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड की तकदीर बदलेगी, सीएम मोहन यादव ने किसानों के नवाचारों की सराहना की
NewsPoint•
भोपाल, 10 सितंबर। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने टीकमगढ़ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की पानी की समस्या को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से हल किया जाएगा। उन्होंने किसानों द्वारा खेती में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की और कहा कि किसानों की समृद्धि से ही देश की समृद्धि जुड़ी है। मध्य प्रदेश सरकार किसानों को हर संभव सुविधा देकर उनकी आय बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड के विकास के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य सिंचाई बढ़ाकर उत्पादन बढ़ाना और किसानों को अधिक लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बुंदेलखंड का चेहरा बदल जाएगा। टीकमगढ़ की पीतल की मूर्तियां और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचार अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
मुख्यमंत्री यादव ने उन्नत खेती करने वाले किसानों से बातचीत की। उन्होंने विष्णु शर्मा अनंतपुरा को सब्जी उत्पादन, पॉली हाउस निर्माण और गौशाला संचालन के लिए बधाई दी। बालचंद अहिरवार ने बताया कि वे प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और उनसे करीब 250 किसान जुड़े हैं। मनोहर लोधी और शशि लोधी ने भी प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। जगदीश अहिरवार ने करीब 15 एकड़ में फूलों की खेती, खासकर स्ट्रॉबेरी, तरबूज, नींबू और अमरूद उगाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग के सहयोग से वे यह काम कर रहे हैं और करीब दो दर्जन लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। साथ ही, वे 15 गायों को पालकर दूध उत्पादन से भी अच्छी कमाई कर रहे हैं। किसान रमेश यादव ने बताया कि वे 2005 से बीज उत्पादन का काम कर रहे हैं और अब तक करीब 3 लाख क्विंटल बीज उत्पादन करने में सक्षम हुए हैं। सुनीता बुंदेला ने मधुमक्खी पालन के बारे में बताया कि वर्तमान में 5 केंद्र काम कर रहे हैं। यह मेहनत वाला काम है लेकिन इससे काफी आर्थिक लाभ होता है।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि बुंदेलखंड, जो पानी की कमी के लिए जाना जाता है, अब केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से अपनी तकदीर बदलने की राह पर है। यह परियोजना इस क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। उन्होंने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और नए तरीके अपनाने की लगन ही प्रदेश को आगे ले जाएगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसानों की खुशहाली ही देश की तरक्की का आधार है। इसलिए, Madhya Pradesh Government किसानों को हर तरह की मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि उनकी आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से मजबूत हों।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की दूरदर्शिता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बुंदेलखंड के विकास को ध्यान में रखते हुए केन-बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना को हरी झंडी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्याप्त सिंचाई की व्यवस्था हो, जिससे खेती में उत्पादन बढ़े और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिले। मुख्यमंत्री को पूरा भरोसा है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद बुंदेलखंड का परिदृश्य पूरी तरह से बदल जाएगा।
मुख्यमंत्री यादव ने टीकमगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, पीतल की मूर्तियों के निर्माण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से टीकमगढ़ के शिल्पी अपनी कला के लिए जाने जाते हैं, उसी तरह से यहां के किसान भी कृषि के क्षेत्र में नए प्रयोग करके दूसरे जिलों के लिए एक मिसाल कायम कर रहे हैं। यह देखकर बहुत खुशी होती है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने उन किसानों से सीधे संवाद किया जो उन्नत कृषि विधियों को अपना रहे हैं। उन्होंने किसानों द्वारा किए जा रहे अथक परिश्रम और उनके द्वारा लाए गए नवाचारों की जमकर तारीफ की। मुख्यमंत्री यादव ने विशेष रूप से विष्णु शर्मा अनंतपुरा को उनके बहुआयामी प्रयासों के लिए बधाई दी। वे न केवल सब्जी उत्पादन और पॉली हाऊस निर्माण में सफल हुए हैं, बल्कि गौशाला का संचालन भी कर रहे हैं, जो एक सराहनीय कार्य है।
बालचंद अहिरवार ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पूरी तरह से प्राकृतिक खेती पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह एक ऐसा तरीका है जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और उपज भी स्वास्थ्यवर्धक होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्राकृतिक खेती से लगभग 250 अन्य किसान भी जुड़ चुके हैं, जो एक अच्छी बात है। मनोहर लोधी और शशि लोधी ने भी प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया, जिससे यह पता चला कि यह विधि न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी है बल्कि किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।
जगदीश अहिरवार ने फूलों की खेती में अपनी विशेषज्ञता के बारे में बताया। उन्होंने लगभग 15 एकड़ जमीन पर फूलों की खेती की है, जिसमें विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी, तरबूज, नींबू और अमरूद जैसे फल भी उगाए जा रहे हैं। अहिरवार ने बताया कि वे उद्यानिकी विभाग से लगातार मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं और इस काम से करीब दो दर्जन लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। इसके अलावा, वे 15 गायों का पालन भी कर रहे हैं और दुग्ध उत्पादन से भी अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। यह दर्शाता है कि वे खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी जोड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
किसान रमेश यादव ने बीज उत्पादन के क्षेत्र में अपने लंबे अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2005 से बीज उत्पादन का काम कर रहे हैं और अब तक लगभग 3 लाख क्विंटल बीज उत्पादन करने में सक्षम हुए हैं। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने में मदद करती है।
सुनीता बुंदेला ने मुख्यमंत्री को मधुमक्खी पालन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 5 केंद्र इस काम को कर रहे हैं। यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें काफी मेहनत लगती है, लेकिन इसके आर्थिक लाभ भी बहुत अच्छे होते हैं। मधुमक्खी पालन से न केवल शहद मिलता है, बल्कि परागण में भी मदद मिलती है, जो फसलों के लिए फायदेमंद है।