11 हज़ार सैलरी और 4 हज़ार की गैस, कैसे करें गुजारा?

नवभारतटाइम्स.कॉम
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n NBT रिपोर्ट, नोएडा

चमकते शीशों वाली गगनचुंबी इमारतें और फर्राटा भरती गाड़ियों वाले इस हाईटेक शहर की नींव जिन हाथों ने रखी है, आज वही हाथ अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। नोएडा में हाल ही में भड़की मजदूर आंदोलन की आग केवल वेतन वृद्धि की मांग नहीं थी, बल्कि यह उन हजारों परिवारों की त्राहि-त्राहि थी, जिनके चूल्हे महंगाई की भेंट चढ़ चुके हैं। नोएडा जैसे महंगे शहर में, जहां एक कमरे का किराया ही मजदूर की आधी सैलरी निगल जाता है। वहां मात्र 11 हजार रुपये में जीवन व्यतीत करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

वैश्विक उथल-पुथल ने नोएडा के इन श्रमिकों की थाली से रोटी छीन ली है। सबसे बड़ा प्रहार रसोई गैस की किल्लत और उसकी कालाबाजारी ने किया है। जो सिलेंडर कभी 900 रुपये में मिलता था, उसके लिए आज मजदूरों को 3 से 4 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही मकान किराया, बिजली बिल, बच्चों की पढ़ाई और राशन के बढ़ते दामों ने मजदूरों को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में हुई वेतन वृद्धि ने इस असंतोष को हवा दी, जिसके बाद मजदूर सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। हालांकि सरकार ने अब वेतन बढ़ाने का कदम उठाया है, लेकिन क्या यह बढ़त बढ़ती हुई महंगाई के जख्मों पर मरहम लगा पाएगी?