n NBT रिपोर्ट , फरीदाबाद : आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को निजी अस्पतालों में लाभ न मिलने की लगातार मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग अब ऐक्शन मोड में आ गया है। सीएम फ्लाइंग की हालिया कार्रवाई के बाद विभाग ने सख्ती बढ़ाते हुए व्यवस्था सुधारने के ठोस कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए योजना से जुड़े सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की साप्ताहिक फील्ड रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पेश करें। जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-कौन से निजी अस्पताल नियमों का सही पालन कर रहे हैं और किन संस्थानों में लापरवाही बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, मरीजों को योजना का पूरा लाभ दिलाने के लिए अस्पतालों में सूचना बोर्ड लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। इस पहल से जिले के जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का उद्देश्य है कि आयुष्मान योजना का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा के पहुंचे और उन्हें इलाज के लिए भटकना न पड़े।
आईएम का आरोप- 600 करोड़ का है सरकार पर बकाया : आईएमए हरियाणा ने आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पतालों पर छापेमारी की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई बिना किसी ठोस शिकायत के की गई और अस्पतालों को परेशान करने का प्रयास है। यह कदम डॉक्टरों और अस्पतालों के खिलाफ अनुचित दबाव बनाने जैसा है। आयुष्मान हरियाणा के सीईओ सतीश सिंह और टीम के बीच एक ऑनलाइन बैठक हुई। अधिकारियों ने डॉक्टरों की समस्याएं सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। 4 मई को अगली बैठक से पहले समाधान निकालने की बात कही गई है। आईएमए का आरोप है कि सरकार को अस्पतालों का करीब 600 करोड़ रुपये बकाया भुगतान करना है। इसके बजाय अस्पतालों पर कार्रवाई कर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। अब 20 अप्रैल को अपने सदस्यों के साथ फिर बैठक करेगा और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

