Scrap Is No Longer Junk But A Valuable Resource For The Future Ardee Industries Chairman Sandeep Agarwal
'कबाड़ नहीं, अब भविष्य का संसाधन है स्क्रैप'
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, मुंबई: रिसाइक्लिंग को अब 'स्क्रैप बिजनेस' के बजाय 'रिसोर्स रिकवरी' के रूप में देखा जाना चाहिए। स्क्रैप कचरा नहीं, बल्कि एक संसाधन है। इस्तेमाल हो चुके उत्पादों से दोबारा मूल्यवान धातुएं निकालना न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। यह कहना है Ardee Industries के चैयरमेन और एमडी संदीप अग्रवाल का। अग्रवाल ने बताया कि बैटरी और मेटल रीसाइक्लिंग से जुड़ी कंपनियां केवल स्क्रैप प्रोसेसर नहीं बल्कि उत्पादन में काइजेन तथा AI जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाकर कंपनियां क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन का हिस्सा बन गई हैं।
अग्रवाल ने बताया कि देश में ऑटोमोबाइल, इनवर्टर, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर और औद्योगिक बैकअप सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली लेड-एसिड बैटरियों की मांग लगातार बढ़ रही है। अग्रवाल का मानना है कि चीन से होने वाले सस्ते इम्पोर्टेड लेड सप्लाई को लेकर हमें खतरा महसूस करने की जरूरत नहीं। वे कहते हैं, ‘हमें चीन को खतरा समझना बंद करना होगा। वह कस्टमर है।’ यह पूछने पर कि सरकार की बैटरी वेस्ट पॉलिसी से कितना फायदा हो रहा है? जवाब में संदीप कहते हैं कि लेड-एसिड बैटरी बनाने वालों की 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' होती है। बेची गई लगभग 90% बैटरी इकट्ठा कर या तो खुद रिसाइकल करों या रजिस्टर्ड रिसाइकलर्स को देना होता है।
ईवी को लेकर अग्रवाल का मानना है कि ईवी में भी सहायक प्रणालियों के लिए लेड-एसिड बैटरी का उपयोग होता है। भविष्य में जब बड़ी मात्रा में ईवी बैटरी स्क्रैप उपलब्ध होगा, तब उस क्षेत्र में भी अवसर पैदा होंगे। कंपनी की EV बैटरी रिसाइक्लिंग पर भी नजर है। आर्डी इंडस्ट्रीज , IPO के जरिए 426 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। 5 अगस्त को खुल रहे अपने IPO को लेकर अग्रवाल ने बताया कि कंपनी इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुके एनर्जी स्टोरेज प्रोडक्ट्स, नॉन-फेरस स्क्रैप की रीसाइक्लिंग पर ध्यान देती है और रीसाइक्लिंग क्षमता 1,56,950 MTPA है। प्रोडक्ट्स एनर्जी स्टोरेज, ई-मोबिलिटी, ऑटोमोटिव और केमिकल्स जैसे सेक्टर में है।