भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी मिलेगी डिग्री

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big decision by yogi government degrees will now be available on indian knowledge tradition approval for establishment of research chairs
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : प्रदेश में ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा और शोध से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शासन ने विश्वविद्यालयों, राजकीय तथा सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन शोधपीठों में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, जैन और बौद्ध दर्शन, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, स्थापत्य कला, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर अध्ययन तथा शोध को बढ़ावा मिलेगा।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। विद्यार्थियों के लिए इन विषयों में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू होंगे, जिससे उन्हें औपचारिक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। शोधपीठों के माध्यम से पीएचडी, पोस्ट डॉक्टोरल, स्नातक और परास्नातक स्तर के शोधार्थियों को शोध अनुदान तथा अकादमिक सहायता दी जाएगी। दुर्लभ पांडुलिपियों और प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण करवाया जाएगा तथा शोध सामग्री ओपन एक्सेस डिजिटल लाइब्रेरी और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से उपलब्ध होगी। योजना में 50 वर्ष से पुराने और 5,000 से अधिक विद्यार्थियों वाले पात्र संस्थान आवेदन कर सकेंगे। चयनित संस्थानों को पांच वर्षों के लिए दो करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे ज्ञान परंपरा को अकादमिक पहचान और युवाओं में विरासत के प्रति रुचि बढ़ेगी।