भविष्य के भरोसे बैठे रहे, तो कुछ नहीं मिलेगा

Contributed byसुमित पॉल|नवभारतटाइम्स.कॉम
live in the present shape the future leave procrastination do work today
जीवन की दिशा भाग्य नहीं, हमारे प्रतिदिन के निर्णय तय करते हैं। जो व्यक्ति वर्तमान का सम्मान करता है, वही समय का सही उपयोग कर पाता है। रोमन कवि होरेस का प्रसिद्ध कथन है, ‘आज के दिन को पूरी तरह जीओ और भविष्य पर जितना कम हो सके, उतना ही भरोसा करो।’ यह कथन हमें जीवन का एक गहरा संदेश देता है। समय तेजी से बदलता है। जो अवसर आज हमारे सामने है, वही सबसे मूल्यवान है। इसलिए उसे टालने या भविष्य के भरोसे छोड़ने के बजाय पूरे मन से जीना चाहिए।

संत कबीर ने भी यही बात अपने प्रसिद्ध दोहे में कही है, ‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।’ यह दोहा केवल समय प्रबंधन का संदेश नहीं देता, जीवन की अनिश्चितता का भी बोध कराता है। अस्तित्ववादी दर्शन भी कहता है कि वास्तव में हमारा अपना केवल यही वर्तमान क्षण है। बीता हुआ कल इतिहास बन चुका है और आने वाला कल एक रहस्य है। इसलिए जो करना है, उसे अभी करना बुद्धिमानी है।
टालमटोल मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है। हम अक्सर कठिन कार्यों को बाद के लिए छोड़ देते हैं, जबकि यही आदत हमारे सपनों और संभावनाओं को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है। कल की जिम्मेदारियों से आज बचने का प्रयास अंततः हमें और अधिक बोझिल बना देता है। वास्तव में, समय की सबसे बड़ी चोरी कोई और नहीं, हमारी अपनी टालमटोल की प्रवृत्ति करती है। सूफी संत रूमी कहते हैं कि अगला क्षण अनिश्चितता के गर्भ में छिपा रहता है। भविष्य कैसा होगा, यह हमारे आज के कर्मों से तय होता है। इसलिए भविष्य के प्रति सबसे बड़ी उदारता यही है कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ वर्तमान को समर्पित करें।

आध्यात्मिक चिंतक एकहार्ट टॉले लिखते हैं, ‘गहराई से समझिए कि वर्तमान क्षण ही वास्तव में आपके पास है।’ अतीत हमें अनुभव दे सकता है, पर लौटकर नहीं आता। भविष्य आशा देता है, पर उसकी कोई निश्चितता नहीं। इसलिए जीवन की वास्तविक शक्ति इसी क्षण में है। जो व्यक्ति वर्तमान को पूरी सजगता, समर्पण और कर्मशीलता के साथ जीता है, वही अपने भविष्य को संवार पाता है।