अंगूठा छाप से अंगूठा टॉप

नवभारतटाइम्स.कॉम
अंगूठा छाप से अंगूठा टॉप
अंगूठे का अपना मनोविज्ञान है। सीधा तो शाबासी, उलटा तो उदासी। 90 की पीढ़ियों ने तो यही समझा है। लिहाजा, सुरम्य के बेहतरीन सुर पर सुधर्मा ने अंगूठा ऊपर यानी ‘थंब्स अप’ कर दिया। लेकिन, सुरम्य के चेहरे पर खुशी की जगह हताशा थी, गिटार उठा वह अपने कमरे में चलते बना। परेशान सुधर्मा सीधे सुखनंदन के पास पहुंचीं। वह Gen Z की भाषा समझने में ऐसे लगे थे, जैसे पुराने रेडियो पर वाईफाई पकड़ा रहे हों।

वाकया सुन सुखनंदन ने ठंडी आह भर कहा, ‘प्रिये! यह अंगूठा टॉप पीढ़ी है, इसके आगे हम अंगूठा छाप हो चुके हैं। हमारे लिए जो थंब्स अप ‘कूल’ था, इनके लिए ‘रूड’ हो चुका है। इतिहास में अर्जुन की श्रेष्ठता के लिए द्रोण ने एकलव्य का अंगूठा कटवाया, तो वर्तमान में इन्होंने भाषा को ही ‘ड्रोन’ बनाकर उड़ाना शुरू कर दिया है।’ ‘ये अंगूठा टॉप का क्या मतलब है?’ सुधर्मा की जिज्ञासा जगी। ‘ लोकतंत्र के भविष्य के नाम पर उन्हें कोसा गया जिन्हें अंगूठाछाप कहा जाता है। वे तो हर हाल में बूथ तक पहुंच अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे, लेकिन जिन्होंने अंगूठे में कलम फंसाई, वे केवल लोकतंत्र पर व्याख्यान देते रहे। लेकिन, इस पीढ़ी ने साबित कर दिया कि असली लोकतंत्र अंगूठे में ही है, इसलिए ये अंगूठा टॉप हैं।’
‘इसकी सुबह स्क्रीन पर अंगूठे से होती है और रात को आंख भी अंगूठे से स्क्रीन बंद करने पर होती है। हमारे समय लोकतंत्र पांच साल में एक बार अंगूठे की स्याही मांगता था। इनके समय हर पांच मिनट में अंगूठा कंटेंट पर मतदान करता है। जिसे हम जनमत कहते थे, उसे ये एंगेजमेंट कहते हैं। पहले नेता भीड़ गिनते थे, अब कमेंट गिनते हैं। पहले रैली फेल होती थी, अब रील फेल होती है। लोकप्रियता की कसौटी अब भीड़ भरा जंक्शन नहीं, कमेंट सेक्शन है। स्क्रीन पर कोई भी हो उसके लिए बेधड़क सवाल है, और सवाल ही लोकतंत्र की जान है।’ पीछे सुरम्य ‘क्लॉक इट’ मुद्रा में खड़े थे।