बिजनेस से जुड़े नियमों का पालन करना अब भी चुनौती

नवभारतटाइम्स.कॉम
compliance with business regulations still a challenge parliamentary panel report
n पीटीआई, नई दिल्ली

संसदीय पैनल की रिपोर्ट के अनुसार स्टेकहोल्डर्स ने संसदीय समिति को बताया है कि केंद्र सरकार की ओर से कई चरणों में नियमों को आसान बनाने की कोशिशों के बावजूद, घरेलू कंपनियों के लिए बिजनेस से जुड़े नियमों का पालन करना अब भी एक बड़ी मुश्किल बनी हुई है।
'भारत में बिजनेस करना: आगे का रास्ता' (Doing Business in India: The Way Forward) विषय पर कॉमर्स से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, स्टेकहोल्डर्स ने पैनल को बताया कि हालांकि पूरे देश में नियमों को तर्कसंगत बनाने के अभियानों से 40,000 से ज्यादा रेगुलेटरी जरूरतों को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया है, लेकिन एक-दूसरे से टकराने वाले या दोहराव वाले नियमों के बने रहने से फिक्स्ड ऑपरेशनल लागत बढ़ रही है और लंबे समय के लिए पूंजी लगाने की प्रक्रिया बाधित हो रही है।

स्टेकहोल्डर्स ने एक संसदीय समिति को बताया है कि केंद्र सरकार की ओर से कई चरणों में नियमों को आसान बनाने (डीरेगुलेशन) की कोशिशों के बावजूद, घरेलू कंपनियों के लिए बिज़नेस से जुड़े नियमों का पालन करना (बिजनेस कंप्लायंस) अभी भी एक बड़ी मुश्किल बनी हुई है।

एक उदाहरण देते हुए समिति ने बताया कि भारत में काम करने वाली एक आम कंपनी को अभी नियमों के एक पुराने और आपस में न जुड़े हुए जाल से गुजरना पड़ता है। इसमें 1,536 अलग-अलग कानून शामिल हैं, जो कुल मिलाकर 69,233 अलग-अलग कंप्लायंस की शर्तें लागू करते हैं और सरकार के तीनों स्तरों पर 6,618 अलग-अलग कानूनी फाइलिंग की जरूरत होती है।

स्टेकहोल्डर्स ने यह भी बताया है कि सरकार ने चार लेबर कोड (श्रम संहिता) बनाए हैं, जिनमें 29 केंद्रीय कानूनों को मिलाया गया है और जिनमें कंप्लायंस के बोझ को कम करने की क्षमता है; हालांकि, पूरी तरह लागू होने के बाद भी इसमें बड़ी रुकावटें बनी हुई हैं।

कंज्यूमर प्रोटेक्शन के मुद्दे पर, पैनल ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' और गुमराह करने वाले विज्ञापनों से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। यूज़र्स को नुकसान पहुंचाने वाली टेक्नोलॉजी से बचाने के लिए, पैनल ने 'डायनामिक प्राइसिंग' पर सख्त रेगुलेटरी निगरानी रखने की सिफारिश की। इसके तहत, प्लेटफॉर्म्स को चेकआउट के समय कंज्यूमर की सर्च हिस्ट्री, डिवाइस टाइप या लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करके कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाने से रोका जाना चाहिए।