नौ मन तेल

नवभारतटाइम्स.कॉम
the idiom of nine man oil and the controversy of adulterated oil questions on radhas patriotism
ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी। मान लीजिए नौ मन तेल पूरा कर दिया पर तेल में एथेनॉल हो तो राधा नाचेगी? राधा हमारे पड़ोस में रहने वाली युवती है। मेरी इस टिप्पणी पर उसने गुस्सा कर कहा, 'मुहावरे में खाने वाले तेल की बात हो रही है, गाड़ी में डाले जाने वाले तेल की नहीं।' मैंने पूछा, 'तुम्हें कैसे पता?' वह सिर खुजलाते हुए चली गई।

शाम को राधा की रील आई। रील की शुरुआत में एक बड़े-से बर्तन में तेल गिराया जा रहा था। जैसे ही वेइंग स्केल पर तेल नौ मन यानी 360 किलो हुआ, राधा नाचने लगी। राधा नाच ही रही थी कि एक माइकधारी रिपोर्टर रील में प्रकट हुआ। चीखने लगा, 'देखिए, राधा ने नाचने के लिए इतना तेल खराब कर दिया।' राधा घबरा गई। रील अचानक बंद हो गई। चिंता में मैं राधा के घर गया। पता चला वह किसी टीवी चैनल के स्टूडियो गई है। शाम को टीवी खोला तो राधा प्राइम टाइम की बहस में बैठी थी। एंकर उस पर गला फाड़ रहा था, 'आपने इतना तेल क्यों खराब किया, जबकि कहा जा चुका है कि तेल का कम इस्तेमाल करना देशभक्ति है। क्या आप देशद्रोही हैं?' 'तेल खराब नहीं किया, रील के बाद वह इस्तेमाल हो जाएगा।' इतनी देर में टीवी पर पट्टी चलने लगी, राधा के घर में रील के लिए इस्तेमाल किया गया तेल मिलावटी था। एंकर फिर दहाड़ा, ' मिलावटी तेल पर रील बनाकर राधा अपने फॉलोअर्स को बेवकूफ बना रही है।' राधा का चेहरा सफेद पड़ गया, 'तेल का असली या नकली होना मुझे कैसे पता चलेगा, जांचने का काम तो खाद्य सुरक्षा वालों का है।' पर, राधा की आवाज शोर में दब गई। चैनल पर पोल चलने लगा- मिलावटी तेल का इस्तेमाल करने वाली राधा देशभक्त है या देशद्रोही। राधा ने माइक निकाला और यह कहते हुए चली गई कि अपनी दोस्ती बनी रहे। देर रात राधा का मेसेज आया, 'काश, मुहावरे में गाड़ी वाला तेल होता तो मिलावट एथेनॉल की ही होती और मैं देशभक्त बनी रहती।'