Trumps Pressure New Us Tension For India On Russian Oil And H 1b Visas
ट्रंप ने दी टेंशन
नवभारतटाइम्स.कॉम•
अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे वक्त में हुई है, जब रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और वीजा का मुद्दा उलझा हुआ है। इन दोनों ही मामलों से भारत के हित गहरे जुड़े हैं।
दबाव का हथियार । अमेरिकी सेनेट ने उस बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे सरकार को उन देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जो रूस से क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस खरीदने में टॉप 5 में हैं। भारत इस लिस्ट में है। डॉनल्ड ट्रंप लगातार टैरिफ को दूसरे देशों पर दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और मौजूदा बिल उसी का नमूना है। रूस के साथ किसी समझौते तक पहुंचने और यूक्रेन युद्ध रुकवाने में मिल रही नाकामी को वॉशिंगटन दूसरे देशों पर थोपना चाहता है।देश का हित । तेल के जरिये रूस को झुकाने की कोशिश शायद ही सफल हो, बल्कि पश्चिम एशिया संकट ने उसकी अहमियत और बढ़ा दी है। ग्लोबल क्रूड ऑयल प्रॉडक्शन में रूस की हिस्सेदारी 11-12% है। जब होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही सामान्य होने के संकेत नहीं मिल रहे, बाब-अल मंडेब रूट पर भी खतरा है, तब वैश्विक बाजार में स्थिरता के लिए रूसी तेल महत्वपूर्ण हो जाता है। और फिर भारत के लिए सबसे अहम है राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा। आयात पर अति निर्भरता की वजह से जरूरी है कि साझेदारी में विविधता हो। कोई तीसरा देश यह नहीं तय कर सकता कि नई दिल्ली और मॉस्को आपस में किन चीजों का व्यापार करेंगे।
बदलती नीतियां । व्यापार नीतियां हालात के मुताबिक चलती हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के पहले भारत ज्यादातर LPG मंगाता था मिडिल ईस्ट से, लेकिन अब 67% के साथ अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने भी तो संघर्ष के बीच में रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट दी थी, क्योंकि तब दाम तेजी से बढ़ रहे थे। किसी मनमाने कानून के जरिये सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश पूरी दुनिया पर असर डालेगी।
संवाद जरूरी । अमेरिका की वीजा पॉलिसी भी भारत को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। ट्रंप प्रशासन H-1B वर्कर्स को नौकरी जाने के बाद मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को खत्म करने की तैयारी में है। 70% से ज्यादा H-1B वीजा होल्डर भारतीय हैं, इसलिए उन पर असर भी ज्यादा पड़ने की आशंका है। भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में करीबी बढ़ा रहे हैं, लेकिन साथ में इन मसलों पर संवाद भी जरूरी है।