Digital Detox Get Freedom From Social Media Noise Bring Peace To Life
प्रेम और रस का सफर है अष्टमैथुन
नवभारतटाइम्स.कॉम•
महान सूफी संत रूमी की सीख है, 'आप जितने शांत होते हैं, उतना ही अधिक सीख पाते हैं।' शोर से भरी इस दुनिया में कभी-कभी सबसे जरूरी काम होता है शांति की ओर लौटना। आजकल सबसे ज्यादा शोर मचा है सोशल मीडिया पर। भाषा, नैतिकता, नियम, राजनीति और व्यापार - सब कुछ उलझा पड़ा है यहां। बहस करने वाले ही नहीं, बहस का मंच देने वाला प्लैटफॉर्म भी परेशान है। अमेरिका में मुकदमेबाजी हुई पड़ी है और भारत में फटकार मिल रही है। जब इतने सवाल हों और सही-गलत के बीच की रेखा धुंधली नजर आ रही हो, तो बेहतर है कुछ देर का ब्रेक।
मशहूर कहावत है कि लोहे को लोहा काटता है, जैसे जहर को जहर और वायरस को वायरस। हालांकि सोशल मीडिया की काट सोशल मीडिया नहीं, उससे दूरी है - डिजिटल डिटॉक्स। यह आइडिया आया इसी सदी में, जब स्मार्टफोन का जीवन में दखल बढ़ा। शुरुआत कुछ घंटों के ब्रेक से हुई थी और अब दिनों पर आ गई है। कई देशों में तो क्लब तक चलते हैं इस प्रैक्टिस के लिए। यहां लोग साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, खाते-पीते हैं और अखबार पढ़ते हैं - बिल्कुल पुराने दौर की तरह। नीदरलैंड के ऑफलाइन क्लब ने कई देशों में फ्रैंचाइजी खोल रखी है।लेकिन, जो स्मार्टफोन इंफोटेनमेंट देता है, उससे दूरी में आनंद कैसा? इसका जवाब छिपा है इस साथ की कीमत में। स्मार्टफोन और उस पर इंस्टॉल सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म बदले में हमारे जीवन के उस स्पेस को भर देते हैं जो असल में होता है दोस्त-यारों, नाते-रिश्तेदारों या खुद हमारा। इस स्पेस को डिजिटल डिटॉक्स वापस दिलाता है। और आपको पता है कि कोई जगह कभी खाली नहीं रहती। उसमें कोई किताब खोली जा सकती है, पड़ोसी का हालचाल लिया जा सकता है, पार्क में टहल सकते हैं, पेड़ों से बात कर सकते हैं और कुछ नहीं तो बालकनी में बैठ आसमान में आते-जाते बादलों को ही निहार लीजिए।
इसमें शक नहीं कि डिजिटल वर्ल्ड ने हमारे लिए इंफॉर्मेशन का नया दरवाजा खोल दिया, लेकिन इसने ही दिया FOMO नाम का एक नया डर और मजबूरी हमेशा उपलब्ध रहने की। हर मेसेज का जवाब देना, हर नोटिफिकेशन देखना, हर बहस में शामिल होना और ट्रेंड को फॉलो करना - एक वक्त के बाद बताना मुश्किल हो जाता है कि कौन किसे चला रहा है। इस डिजिटल गुलामी से आजादी दिलाता है डिजिटल डिटॉक्स। इस पर कई रिसर्च भी हुई हैं, जिनमें पाया गया कि एक निश्चित समय-सीमा के लिए स्मार्टफोन से दूरी ने तनाव, चिंता, चिड़चिड़ेपन और नींद से जुड़ी परेशानियों को दूर कर दिया।
डिजिटल डिटॉक्स दरअसल जीवन की प्राथमिकता तय करना है। यह उस ऑफलाइन दुनिया को महसूस करना है, जो बिना किसी फिल्टर के हमारे सामने मौजूद है, पर स्क्रीन की वजह से हम नजरअंदाज कर देते हैं।