बस नौकरी नहीं, भरोसा मांग रहा झारखंड

नवभारतटाइम्स.कॉम
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झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं को लेकर उपजा विवाद अब महज किसी एक परीक्षा की गड़बड़ी का मामला नहीं रह गया है। यह राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और पूरी परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा सवाल बन चुका है। जुलाई के आखिरी हफ्ते से शुरू हुआ आंदोलन यह जवाब चाहता है कि क्यों बार-बार गड़बड़ी हो रही है? मामला गंभीर है और राहुल गांधी को कांग्रेस के समर्थन वाली सोरेन सरकार को पत्र लिखना पड़ा है।

पुरानी समस्या । झारखंड गठन के शुरुआती वर्षों में ही JPSC की परीक्षाएं विवादों में आ गई थीं। आयोग के प्रथम अध्यक्ष दिलीप प्रसाद पर नियुक्तियों में पद के दुरुपयोग और अनियमितता के गंभीर आरोप लगे। दूसरी JPSC परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर, अंकों में बदलाव और रिश्तेदारों व परिचितों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच सीबीआई ने की थी।
पारदर्शिता पर सवाल । जांच एजेंसी ने तत्कालीन अध्यक्ष, आयोग के कई सदस्यों, परीक्षा नियंत्रक समेत 37 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। यह प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का सवाल झारखंड में वर्षों पुराना है। जांच के दौरान आयोग की कार्यप्रणाली और जांच एजेंसी के साथ कथित असहयोग को लेकर भी सवाल उठे।

धैर्य खत्म हुआ । सरकारें बदलीं, राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन भर्ती परीक्षाओं को लेकर शिकायतों का सिलसिला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। वर्तमान विवाद ने इसी पुराने दर्द को फिर उभार दिया है। 14वीं सिविल सेवा, बैकलॉग और वन सेवा समेत विभिन्न परीक्षाओं में OMR शीट से छेड़छाड़ और साक्षात्कार में अनियमितता के आरोपों ने युवाओं के धैर्य की सीमा तोड़ दी।

राजनीति से दूर । संयमित और मुद्दा केंद्रित शैली के कारण यह आंदोलन अलग है। इसमें किसी राजनीतिक दल के मंच के इस्तेमाल पर रोक, किसी व्यक्ति, दल या धार्मिक संस्था के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा से परहेज जैसे नियम बनाए गए हैं। यही अनुशासन आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

स्थायी समाधान चाहिए । स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सर्वोच्च जिम्मेदारी झारखंड के युवाओं की मेहनत का सम्मान और उनकी प्रतिभा को न्याय दिलाना है। परीक्षा व्यवस्था पर संदेह को उन्होंने पूरी एक पीढ़ी के विश्वास से जुड़ा विषय बताया। सीएम ने वादे तो कई किए हैं, असल चुनौती उनको जमीन पर उतारने की है। झारखंड के युवा सिर्फ नौकरी नहीं चाहते, उनकी मांग निष्पक्ष अवसर की है। JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था में यदि पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता कायम होती है, तभी आंदोलन से उठे सवालों का स्थायी समाधान संभव होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)