सुधार की चुनौती

नवभारतटाइम्स.कॉम
major reshuffle in nta challenge to reform examination system and win students trust
नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में किए गए व्यापक बदलाव उस संकट के सबूत हैं, जिसने पिछले कुछ समय में देश की परीक्षा व्यवस्था और लाखों छात्रों पर असर डाला है। 50 से ज्यादा कर्मचारियों को हटाना और महत्वपूर्ण पदों पर नए विशेषज्ञों की भर्ती का फैसला सिस्टम में सुधार के साथ-साथ भरोसा बहाली की कोशिश भी है।

UGC-NET गड़बड़ी । यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब UGC-NET की वजह से NTA फिर सवालों में है। दो दिन पहले ही एजेंसी ने बताया था कि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्न पत्रों में कई गलतियां थीं। कई सवाल दोहराए गए थे। किसी सामान्य परीक्षा में भी तथ्यात्मक, टाइपिंग और ट्रांसलेशन से जुड़ी गलतियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता, फिर यहां तो लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा है। NTA पर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन साल 2017 में स्थापना के बाद से ही इसके साथ विवादों का सिलसिला जुड़ता चला गया।
विशेषज्ञों का इस्तेमाल । बार-बार गड़बड़ी की वजह से संरचनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में CTO और CFO जैसे पदों पर विशेषज्ञों की नियुक्ति महत्वपूर्ण है। साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स और पेपर डिजाइन करने में प्राइवेट सेक्टर से डोमन एक्सपर्ट्स को लाया जाएगा। उनके अनुभवों से पूरी प्रक्रिया को सुधारने में मदद मिलेगी। अब देखना है कि विशेषज्ञता का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

जवाबदेही स्पष्ट हो । पुराने लोगों को हटाना, नई नियुक्तियां और गोपनीयता के लिए उठाए गए दूसरे कदम जरूरी हैं। लेकिन, इनको सुधार की पूरी गारंटी नहीं माना जा सकता। आखिर सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक, NEET के पेपर लीक में सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भी मिलीभगत थी। ऐसे में एजेंसी को अपनी कार्यप्रणाली पर भी विचार करना होगा। सबसे जरूरी बात है जवाबदेही, जिस पर पहले भी चर्चा हो चुकी है। प्रश्न पत्र बनाने से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परिणाम जारी होने तक - हर चरण पर जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।

केंद्र में स्टूडेंट्स । शिक्षा मंत्रालय ने NTA से एग्जाम प्रॉसेस का ऑडिट कराने और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी है। इससे पारदर्शिता कायम होने की उम्मीद है। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में देश के स्टूडेंट्स हैं और हर फैसला उनके हितों को ध्यान में रखकर उठाया जाना चाहिए। उनको एक निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था देना सरकार की जिम्मेदारी है। आज NTA के सामने अपने कामकाज को सुधारने के साथ छात्रों का यकीन जीतने की भी चुनौती है।