सीखने की इच्छा

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michael faraday inspiring story of becoming a great scientist from humble beginnings
लंदन में 1791 में जन्मे माइकल फाराडे का शुरुआती जीवन बहुत ही साधारण बीता। करीब 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक किताब की दुकान में काम करना शुरू किया और किताबों पर जिल्द चढ़ाने वाले के यहां ट्रेनिंग ली। फाराडे सिर्फ किताबों पर जिल्द नहीं चढ़ाते, पढ़ते भी थे। धीरे-धीरे विज्ञान में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी। वह वैज्ञानिक व्याख्यान सुनते, नोट्स बनाते और प्रयोग करने की कोशिश करते। 1812 में दुकान के एक ग्राहक ने उन्हें प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर हंफ्री डेवी का व्याख्यान सुनने का अवसर दिया। फाराडे ने व्याख्यानों के नोट्स बनाए और उन्हें डेवी को भेज दिया। उनकी लगन और प्रतिभा से प्रभावित होकर डेवी ने उन्हें 1813 में रॉयल इंस्टीट्यूशन में प्रयोगशाला सहायक की नौकरी दिला दी। यहीं से फाराडे के जीवन ने नया मोड़ लिया। लगातार अध्ययन और प्रयोग करते हुए वह आगे बढ़ते गए। बाद में विद्युत और चुंबकत्व के क्षेत्र में उनके प्रयोगों ने आधुनिक विज्ञान की नींव मजबूत की। फाराडे का जीवन सिखाता है कि साधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सीखने की इच्छा सीमित नहीं होनी चाहिए।

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