भाषा और रोजी-रोटी

नवभारतटाइम्स.कॉम
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मराठी भाषा सीखना बहुत अच्छी बात है और महाराष्ट्र में रहने वालों को स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए। लेकिन इसे लेकर ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई चिंता का विषय है। कई चालक वर्षों से मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक भी हैं, जिनके लिए कम समय में नई भाषा सीखना आसान नहीं है। सरकार को सख्ती के बजाय प्रशिक्षण, सहयोग और पर्याप्त समय देने की नीति अपनानी चाहिए। किसी की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। राज्य सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ पुनर्विचार कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे भाषा और रोजगार दोनों का सम्मान बना रहे।

सुधा चौबे, ईमेल से