प्रकृति में छोटी चीज़ों की भी होती है बड़ी भूमिका

नवभारतटाइम्स.कॉम
small things in nature importance and role of phyllosphere in life
पेड़-पौधों के ऊपरी हिस्से को, जहां पत्तियां होती हैं, उसे विज्ञान की भाषा में ‘ फाइलोस्फीयर ’ कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो यह पौधे की पत्तियों के आसपास की दुनिया है। यह हिस्सा धरती पर जीवन के लिए बेहद जरूरी है। सूरज से मिलने वाली रोशनी सीधे हमारे शरीर को ऊर्जा नहीं देती। पौधे पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के जरिये इस रोशनी को भोजन में बदलते हैं। यही भोजन आगे इंसानों, जानवरों और दूसरे जीवों तक पहुंचता है। इस लिहाज से फाइलोस्फीयर धरती पर जीवन को पालने-पोसने वाली व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

पौधों की पत्तियों के कारण धरती पर जीवन सिर्फ कायम ही नहीं रहा, लगातार विकसित भी हुआ। फूलों का विकास हुआ, फिर उनसे फल और बीज बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। फलों और फूलों ने पौधों के साथ-साथ इंसानों और जानवरों के जीवन को भी समृद्ध किया है। परागण में तितलियां, मधुमक्खियां और दूसरे कीड़े बड़ी भूमिका निभाते हैं। इनके बिना कई पौधों में फल और बीज बनना मुश्किल हो जाएगा। फाइलोस्फीयर सिर्फ पत्तियों और कीड़ों की दुनिया नहीं, यहां असंख्य सूक्ष्मजीव भी रहते हैं। ये जैव-विविधता बरकरार रखने, पौधों को स्वस्थ रखने और पर्यावरण का संतुलन कायम रखने में मदद करते हैं। हरी पत्ती इस पूरी व्यवस्था की सबसे अहम इकाई है। वह सूरज की रोशनी को पौधे के लिए भोजन में तब्दील करती है और प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन छोड़ती है, जो इंसानों और जानवरों के लिए जीवनदायी हो जाता है। पत्ती हमें यह समझाती है कि प्रकृति की छोटी दिखने वाली चीजें कितनी बड़ी भूमिका निभाती हैं। पत्तियों की बनावट और उनके कामकाज को समझने के ज्ञान को ‘फाइलोसॉफी’ कहा जा सकता है। ‘फाइलोन’ का मतलब पत्ती और ‘सोफिया’ का मतलब ज्ञान है।
फाइलोस्फीयर केवल पेड़-पौधों का हिस्सा नहीं, धरती पर जीवन की बुनियाद है। इसलिए पेड़ों और हरियाली को बचाना सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं, अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के जीवन को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।