सच्चा आत्मविकास

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true self development dont find faults in others look within learn from sheikh saadi
शेख सादी शिराजी 13वीं शताब्दी के महान फारसी कवि और दार्शनिक थे। उनकी प्रसिद्ध कृतियां 'गुलिस्तां' और 'बुस्तां' आज भी जीवन की गहरी सच्चाइयों और मानवीय मूल्यों की सीख देती हैं। कहा जाता है कि बचपन में एक दिन सादी ने अपने शिक्षक से शिकायत की, 'मेरा एक सहपाठी मुझसे ईर्ष्या करता है। जब मैं हदीस के कठिन शब्दों का सरल अर्थ बताता हूं, तो वह जलने लगता है। अगर उसका यही हाल रहा तो उसे नरक मिलेगा।' शिक्षक मुस्कुराए और बोले, 'दूसरों के दोष गिनाने से पहले अपने भीतर झांकना सीखो। यदि उसके मन में तुम्हारी सफलता को लेकर ईर्ष्या है और उसके व्यवहार से परेशान होकर तुम्हारे भीतर भी क्रोध, द्वेष या घृणा पैदा हो रही है, तो फिर तुम दोनों में अंतर क्या रह गया?' उन्होंने आगे कहा, 'पीठ पीछे उसकी निंदा करके क्या तुम अच्छा काम कर रहे हो?' सादी चुप हो गए। उन्हें अपनी भूल समझ आ गई। सच्चा आत्मविकास दूसरों के दोष खोजने से नहीं, अपने भीतर के दोष पहचानकर उन्हें दूर करने से शुरू होता है।