Vivek Tankha On Vande Mataram Controversy Bjps Move Unnecessary Real Issues Before The Country
वंदे मातरम् पर बेवजह खड़ा किया गया विवाद
नवभारतटाइम्स.कॉम•
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद को अनावश्यक बताया है। हेमंत राजौरा के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि देश के सामने छात्रों, शिक्षा, रोजगार और महंगाई जैसे कई जरूरी मुद्दे हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश :
n वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर आप क्या कहेंगे? वंदे मातरम् को लेकर BJP ने जो विवाद खड़ा किया, मेरे ख्याल से वह अनावश्यक है। स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् के नारे के साथ लोग आगे बढ़ते थे। उस समय महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर निर्णय लिया था कि इसके कुछ अंतरों को ही गाया जाएगा। रवींद्र नाथ टैगोर की सहमति से 1937 में प्रस्ताव पास हुआ। यह पेट्रोल, महंगाई और छात्रों के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
n अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् के दो अंतरे गाए जाएं, तो क्या कानून का उल्लंघन होगा?
कानून बन चुका है। अब आधिकारिक आयोजनों में SOP का पालन किया जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि निजी कार्यक्रम में लोग जितना गाना चाहें उतना नहीं गा सकते। कांग्रेस अपने कार्यक्रम में वही वंदे मातरम् गा रही है, जो नेहरू, गांधी और पटेल ने गाया था। अगर हम अपने कार्यक्रम में राष्ट्रगान से शुरुआत न करें तो क्या वह गलत होगा? वंदे मातरम् का जितना सम्मान है, उतना ही सम्मान राष्ट्रगान का भी है।
n आप वरिष्ठ वकील भी हैं। अगर आपकी कानूनी राय और पार्टी की राजनीतिक लाइन अलग हो जाए तो आप किसे प्राथमिकता देते हैं?
ऐसा कभी होता ही नहीं है। मैं जो कहता हूं, पार्टी वह मानती है। मैंने छात्रों के आंदोलन का साथ दिया, तो पार्टी को इस पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं था। सोनम वांगचुक का मैंने समर्थन किया और पार्टी इस पर खुश थी।
n राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व का सवाल उठा। क्या कॉलेजियम को SC, ST, OBC के प्रतिनिधित्व के लिए जवाबदेह बनाना चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार संस्था है। कॉलेजियम की मौजूदा व्यवस्था में मुझे बदलाव की जरूरत नहीं लगती। अगर सरकार संसद में कोई एक्ट लाकर कॉलेजियम का विकल्प बनाना चाहती है तो वह ला सकती है, लेकिन वह संविधान की भावना के अनुरूप होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था लाई जाए, जिसमें सभी का प्रतिनिधित्व हो तो इसका सभी को समर्थन करना चाहिए। लेकिन, मेरिट का भी ख्याल रखना होगा।
n जंतर-मंतर आंदोलन में राहुल गांधी नहीं गए। क्या वजह थी?
आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा था कि वे राजनेताओं को नहीं जोड़ना चाहते। इसलिए कोई राजनेता नहीं गया। जो आंदोलन से जुड़े थे, वे ही गए। मैं गया था। मैंने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। राहुल तो शुरू से छात्रों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
n आप सोनम वांगचुक के करीबी हैं। उनका अनशन खत्म कराने में क्या आपकी भूमिका थी?
मेरा ध्यान सोनम की जान बचाने पर था। वह जब ICU में थे, तब उनकी पत्नी गीतांजलि परेशान थीं। मैंने उनके इलाज और अस्पताल बदलवाने में मदद की। गीतांजलि ने मुझसे कहा कि आप समझाएंगे, तो वह मान जाएंगे।