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नवभारत टाइम्स

गुरुग्राम के होटल रामाडा में 26 जनवरी 2026 तक एक शानदार फैब्रिक एक्सपो लगा है। यहां महाराष्ट्र की पैठानी, मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियां मिलेंगी। राजस्थान के ब्लॉक प्रिंट और गुजरात के बंधिनी प्रिंट भी उपलब्ध हैं। दक्षिण भारतीय सिल्क साड़ियों के साथ बनारसी, कंथा-स्टिच, बलूचेरी, तंगेल, जामदानी-पटोला और वाराणसी की शिफॉन साड़ियां भी प्रदर्शित हैं।

fiber to silk fab expo grand collection of traditional attire in gurugram till january 26
गुरुग्राम में ' फाइबर टू सिल्क फैब एक्सपो ' में सजेंगे पारंपरिक परिधानों के रंग, 26 जनवरी तक चलेगा आयोजन

गुरुग्राम के होटल रामाडा, सेक्टर-44 में 26 जनवरी 2026 तक आयोजित 'फाइबर टू सिल्क फैब एक्सपो' में इस मौसम में पारंपरिक परिधानों की तलाश करने वालों के लिए एक शानदार मौका है। यह एक्सपो न केवल त्योहारों के लिए, बल्कि शादी के सीजन के लिए भी परिधानों का एक अनूठा संग्रह प्रस्तुत करता है। यहां महाराष्ट्र की असली जरी वर्क वाली पैठानी साड़ी, मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ी, बैंगलोर और मैसूर सिल्क क्रेप से लेकर राजस्थान के ब्लॉक और सांगानेरी प्रिंट, और गुजरात के गठजोड़ा और बंधिनी प्रिंट तक, हर तरह के परिधान उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, दक्षिण भारतीय सिल्क साड़ियों की एक विस्तृत श्रृंखला, बनारसी सिल्क साड़ियां, कंथा-स्टिच सिल्क साड़ियां, बलूचेरी, तंगेल, जामदानी-पटोला सिल्क साड़ियां और वाराणसी की शिफॉन साड़ियां भी खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं। यह प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुली रहेगी और किफायती दामों पर सभी आय वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त उत्पाद उपलब्ध कराएगी।
यह एक्सपो पारंपरिक भारतीय वस्त्रों की विविधता और सुंदरता का एक जीवंत प्रदर्शन है। यहां आपको विभिन्न राज्यों की खास साड़ियों के साथ-साथ जयपुर कुर्ती, राजस्थान की कोटा डोरिया, तंचोई, बनारसी जामदानी, जामवार, और उत्तर प्रदेश की लखनवी चिकन जैसे परिधान भी मिलेंगे। यह प्रदर्शनी बुने हुए, रंगे हुए या मुद्रित कपड़ों की विविध शैलियों को एक साथ लाती है। इसमें पश्चिमी बाजार में लोकप्रिय कढ़ाई के साथ-साथ चित्रमय पिछवाई भी शामिल है। बिक्री के लिए कुछ बेहतरीन रेशमी कपड़े भी प्रदर्शित किए गए हैं जो पार्टी वियर के लिए एकदम सही हैं।

'फाइबर टू सिल्क फैब एक्सपो' में खरीदारों को अनगिनत विकल्प मिलेंगे। महाराष्ट्र की पैठानी साड़ियां अपनी असली जरी वर्क के लिए जानी जाती हैं, जो उन्हें बेहद खास बनाती हैं। मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियां अपनी नाजुक बुनाई और सुंदर डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं। बैंगलोर और मैसूर सिल्क क्रेप से बने परिधान आपके वॉर्डरोब में एक नया और आकर्षक डिजाइन जोड़ सकते हैं।

राजस्थान के ब्लॉक और सांगानेरी प्रिंट अपनी पारंपरिक कला और रंगाई के लिए जाने जाते हैं। ये प्रिंट कपड़ों को एक अनूठा और कलात्मक रूप देते हैं। गुजरात के गठजोड़ा और बंधिनी प्रिंट भी अपनी खास रंगाई तकनीक के लिए मशहूर हैं। बंधेज या बंधिनी एक ऐसी तकनीक है जिसमें कपड़े को कसकर गांठ लगाकर रंगा जाता है, जिससे एक विशिष्ट और आकर्षक डिजाइन बनता है।

दक्षिण भारतीय सिल्क साड़ियां अपनी भव्यता और पारंपरिक रूपांकनों के लिए जानी जाती हैं। बनारसी सिल्क साड़ियां अपनी जटिल बुनाई और सुनहरे धागों के काम के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। कंथा-स्टिच सिल्क साड़ियां अपनी हाथ से की गई कढ़ाई के लिए जानी जाती हैं, जो उन्हें एक कलात्मक स्पर्श देती है। बलूचेरी, तंगेल, जामदानी-पटोला सिल्क साड़ियां और वाराणसी की शिफॉन साड़ियां भी अपनी अनूठी शैलियों और डिजाइनों के साथ खरीदारों को लुभा रही हैं।

यह प्रदर्शनी न केवल साड़ियों तक सीमित है, बल्कि दुपट्टों और सलवार सूट के कपड़ों की एक विस्तृत श्रृंखला भी प्रदान करती है। विभिन्न डिज़ाइन और पैटर्न में उपलब्ध ये परिधान हर अवसर के लिए उपयुक्त हैं। यहां विभिन्न तकनीकों, सामग्रियों और रूपांकनों को समेटे हुए कपड़ों का एक अनूठा संग्रह देखने को मिलेगा।

'फाइबर टू सिल्क फैब एक्सपो' में पहले से ही अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है, जो इस प्रदर्शनी की लोकप्रियता को दर्शाता है। किफायती दामों पर सभी आय वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त उत्पाद उपलब्ध होने के कारण खरीदार कई तरह के उत्पाद चुन सकते हैं। यह एक्सपो भारतीय वस्त्रों की समृद्ध विरासत और विविधता का अनुभव करने का एक बेहतरीन अवसर है।