पानी जांच के लिए निगम बनाएगा अपनी लैब

नवभारत टाइम्स

गाजियाबाद नगर निगम जल्द ही पानी की जांच के लिए अपनी प्रयोगशाला स्थापित करेगा। वर्तमान में, पानी की जांच के लिए बाहरी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता के कारण खर्च अधिक है और नियमित निगरानी मुश्किल है। नई प्रयोगशाला से पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच संभव होगी। इससे कम समय और लागत में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित किया जा सकेगा।

ghaziabad nagar nigam to build its own water testing lab regular monitoring on availability of pure drinking water
गाजियाबाद नगर निगम अब पानी की जांच के लिए अपनी खुद की लैब बनाएगा। अभी तक पानी की जांच के लिए बाहर की लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें हर सैंपल पर 8 से 10 हजार रुपये का खर्च आता है। इस महंगे खर्च की वजह से साल में सिर्फ 50-60 सैंपल की ही जांच हो पाती है, जिससे शहर में सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना मुश्किल हो रहा है। इस समस्या को दूर करने और लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए निगम यह कदम उठा रहा है। इस नई लैब के लिए करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपये का अनुमान है और इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

अभी गाजियाबाद नगर निगम पानी की जांच के लिए कमला नेहरु नगर स्थित एनबीएच से प्रमाणित सेंट्रल लैब की मदद लेता है। इस लैब में पानी की पूरी प्रोफाइल जांचने में हर सैंपल पर 8 से 10 हजार रुपये का भारी भरकम खर्च आता है। इस वजह से, पूरे साल में मुश्किल से 50 से 60 सैंपल की ही जांच हो पाती है। यह स्थिति शहर में सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखने में एक बड़ी चुनौती पेश करती है। इस समस्या का समाधान करने और सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, नगर निगम अपनी खुद की लैब स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस योजना का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
नगर निगम के जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद ने बताया कि प्रस्तावित लैब के लिए लगभग 2 कमरों की जगह और कुछ जरूरी उपकरणों की आवश्यकता होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। इस लैब के बन जाने के बाद, पानी की नियमित जांच संभव हो सकेगी। इससे न केवल जांच में कम समय लगेगा, बल्कि खर्च भी काफी कम हो जाएगा। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि साधारण जांच के लिए राज्य सरकार की दो लैब पहले से मौजूद हैं। इनमें से एक एमएमजी हॉस्पिटल में है और दूसरी सीएमओ ऑफिस में।

फिलहाल, नगर निगम स्तर पर पानी की जो सामान्य जांच की जाती है, उसमें मुख्य रूप से सिर्फ क्लोरीन की मात्रा जांची जाती है। इस जांच से यह पता चलता है कि सप्लाई किए जा रहे पानी में कीटाणुनाशक क्लोरीन तय मानकों के अनुसार है या नहीं। यह जांच पानी की किट से की जाती है। लेकिन, इस सामान्य जांच से पानी में मौजूद जहरीले तत्व और बैक्टीरियल एलिमेंट का पता नहीं चल पाता है। जब सैंपल को बाहर की लैब में भेजा जाता है, तभी पानी की पूरी प्रोफाइल की जांच हो पाती है, जिसमें कई तरह के तत्वों का विश्लेषण किया जाता है। अपनी लैब होने से यह पूरी जांच प्रक्रिया आसान और सस्ती हो जाएगी।