होम्योपैथी कॉलेजों की मान्यता अटकी, फंसेंगे दाखिले

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Ranvijay.Singh1

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लखनऊ : यूपी के राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में इस साल दाखिलों को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नौ राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में से छह कॉलेजों की मान्यता ही अटक गई है। नैशनल कमिशन फॉर होम्योपैथी (NCH) ने इस साल बिना शिक्षकों के सभी पद भरे मान्यता रिन्यू करने से साफ इनकार कर दिया है। आलम यह है कि प्रदेश के जिन तीन कॉलेजों को मान्यता मिली है वो भी इस शर्त के साथ कि 30 दिन के भीतर शिक्षकों की कमी पूरा कर लेंगे।

नीट का रिजल्ट इसी महीने आना है। इसकी मेरिट के हिसाब से होम्योपैथी कॉलेजों में दाखिले की कवायद अगस्त के अंत या सितंबर में शुरू होती है। हालांकि, इन कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर NCH के कड़े रुख के बाद होम्योपैथी निदेशालय से लेकर शासन तक बैठकों का दौर जारी है। आयुष विभाग के सूत्रों की मानें तो लखनऊ स्थित राजकीय नैशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। विभाग की तरफ से NCH को खाली पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन भेजे जाने का तर्क भी दिया गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। NCH का कहना है कि नियमित भर्ती नहीं हो रही तो संविदा पर शिक्षकों की भर्ती होनी चाहिए, लेकिन जिन कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं, वहां दाखिले की मंजूरी नहीं मिल सकती।

सैकड़ों दाखिलों पर लटकी तलवार : आयुष विभाग के मुताबिक मान्यता को लेकर गतिरोध दूर न हुआ तो सैकड़ों दाखिले अटकेंगे। लखनऊ स्थित राजकीय नैशनल होम्योपैथी कॉलेज के अलावा प्रयागराज, आजमगढ़, अलीगढ़, मुरादाबाद और गोरखपुर के राजकीय होम्योपैथी कॉलेजों में बैचलर ऑफ होम्योपैथी मेडिसिन ऐंड सर्जरी (BHMS) की 125-125 सीटें हैं। वहीं, अयोध्या राजकीय होम्योपैथी कॉलेज में 36 और गाजीपुर राजकीय होम्योपैथी कॉलेज में 63 सीटों पर दाखिले होते हैं।

अफसरों ने साधी चुप्पी : कॉलेजों की मान्यता फंसने के पीछे आयुष महकमे के अफसरों की हीलाहवाली और लेटलतीफी को जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में अब कोई अफसर खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है। प्रमुख सचिव रंजन कुमार को कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। वॉट्सऐप पर मान्यता को लेकर गतिरोध का संदेश भेजने पर उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया।

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