संकलन : रेनू सैनी
बात 1940-50 के दशक की है। तब अधिकांश महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित रहतीं। ऐसे समय में एक साहसी महिला साड़ी पहनकर, पीठ पर लगभग 9 किलो वजनी रोलीफ्लेक्स कैमरा लादे, साइकल से पूरी दिल्ली का चक्कर लगातीं। उनका उद्देश्य था राजनीतिक और वीआईपी कार्यक्रमों की तस्वीरें लेना। वर्ष 1942 में उन्होंने प्रेस फोटोग्राफर के रूप में काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनकी तस्वीरें बॉम्बे क्रॉनिकल में प्रकाशित होती थीं, लेकिन फोटो के साथ उनका नहीं, उनके पति का नाम छापा जाता था। उस दौर में महिला फोटोग्राफर की कल्पना भी लोगों के लिए असामान्य थी। कुछ समय बाद उत्कृष्ट तस्वीरें ‘ डालडा 13 ’ नाम से प्रकाशित होने लगीं। यह नाम लोगों के बीच जिज्ञासा का विषय बन गया। जब इस रहस्य से पर्दा उठा, तो सभी हैरान रह गए। ‘डालडा 13’ दरअसल भारत की पहली महिला प्रेस फोटोग्राफर होमाई व्यारावाला थीं। उनका जन्म 1913 में हुआ था, भावी पति से मुलाकात 13 वर्ष की उम्र में हुई और उनके पति की पहली कार का नंबर DLD-13 था। इन संयोगों को जोड़कर उन्होंने यह छद्म नाम चुना। होमाई व्यारावाला की ऐतिहासिक तस्वीरें आज भी भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं।





