I.N.D.I.A. की मुश्किल

नवभारतटाइम्स.कॉम

नई दिल्ली में आज I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक होगी। सदस्य आने वाले चुनावों में भाजपा का सामना करने की रणनीति बनाएंगे। हालांकि, आपसी मतभेद और कांग्रेस से नाराजगी गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती है। क्षेत्रीय दलों के हित भी टकराव पैदा कर रहे हैं। एकजुटता की कमी गठबंधन को कमजोर कर रही है।

india alliances difficulties internal differences and electoral defeats increase concern

नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आज जब I.N.D.I.A. ब्लॉक के सदस्य दल जुटेंगे, तो अजेंडे में होगा कि किस तरह आने वाले चुनावों में BJP का सामना किया जाए, लेकिन उससे बड़ी चुनौती होगी आपसी मतभेदों को दूर करना। हालिया चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद विपक्ष और कमजोर हुआ है। संख्या बल पर चोट पहुंचने के साथ ही उनके बीच का भरोसा भी कम हो गया है। ऐसे में गठबंधन की रणनीतिक दिशा और भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।

साझा उद्देश्य का दावा । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के मुताबिक, 23 दलों ने बैठक में शामिल होने के लिए हामी भरी है। वहीं, TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि यह बैठक एक साझा उद्देश्य और स्पष्ट इरादे से हो रही है। हालांकि जब इन दलों के नेता मिलेंगे तो उन हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा होने की जरूर उम्मीद है, जिनकी वजह से I.N.D.I.A. ब्लॉक की मुश्किलें बढ़ी हैं।

कांग्रेस से नाराजगी । DMK का बायकॉट और CPM की नाराजगी से जाहिर है कि गठबंधन के भीतर असंतोष है और इन दोनों की वजह के केंद्र में कांग्रेस है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने जिस तरह विजय की पार्टी TVK का समर्थन किया, उसे DMK धोखा कह रही है। इसी तरह केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस के लगाए गए आरोपों से CPM खफा है। उसने तो सार्वजनिक तौर पर जवाब भी मांगा है। हालांकि वह बैठक में शामिल होगी।

क्षेत्रीय राजनीति का असर । I.N.D.I.A. ब्लॉक में ऐसी असहज स्थिति पहले भी खड़ी हो चुकी है और इसका कारण है क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा व आपस में टकराते राजनीतिक हित। केंद्र में सारे दल BJP विरोध में एकजुट होने का दावा करते हैं, लेकिन अपने-अपने राज्यों में उनके बीच ही होड़ शुरू हो जाती है। कई बार क्षेत्रीय नेताओं का दबाव और उनका सियासी नफा-नुकसान केंद्रीय स्तर पर असर डालता है। यही वजह है कि I.N.D.I.A. ब्लॉक के भीतरी समीकरण हर थोड़े अरसे बाद रिसेट होते नजर आते हैं।

एकजुटता की जरूरत । अगर इस गठबंधन को वाकई गंभीर विकल्प बनना है, तो हितों के टकराव से बचना होगा। इस समय वैसे भी उसे सबसे ज्यादा एकजुटता की जरूरत है। अलायंस की सबसे प्रमुख सहयोगी TMC बगावत से जूझ रही है। विधानसभा में उसके 80 में से 58 विधायक अपना अलग नेता चुन चुके हैं। अटकलें हैं कि पार्टी के सांसद भी टूट सकते हैं। ऐसा हुआ तो विपक्ष और कमजोर होगा।