‘केवल सात जन्मों का बंधन नहीं, सम्मान का रिश्ता है शादी’

नवभारतटाइम्स.कॉम

शादी को सात जन्मों का बंधन मानने की परंपरा पर सवाल उठ रहे हैं। दहेज, प्रताड़ना और हिंसा वाले रिश्तों को समाज के डर से निभाना गलत है। त्विषा शर्मा की मौत और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने इस सोच को चुनौती दी है। निवासियों ने गरिमा और सुरक्षा को रिश्ते से ऊपर बताया। सोच में बदलाव की जरूरत है।

‘केवल सात जन्मों का बंधन नहीं, सम्मान का रिश्ता है शादी’

n NBT न्यूज, गुड़गांव

हमारे समाज में विवाह को सात जन्मों का बंधन मान रिश्तों को बचाने की सीख दी जाती है। लेकिन जब किसी रिश्ते में सम्मान, विश्वास और सुरक्षा की जगह दहेज, मानसिक प्रताड़ना , घरेलू हिंसा और आर्थिक शोषण ले लेते हैं, तब क्या केवल समाज के डर से उस रिश्ते को निभाते रहना सही होगा। हाल ही में त्विषा शर्मा की मौत के मामले ने पूरे देश को इसी सवाल पर सोचने को मजबूर किया था। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कि ‘बेटी का तलाकशुदा होना बेहतर है, मृत होना नहीं’ ने भी इस सोच को चुनौती दी थी। मुद्दे को लेकर NBT ने सेक्टर-102 की एमार इम्पीरियल गार्डन्स सोसायटी में संवाद किया। इस दौरान निवासियों ने इस मुद्दे पर खुलकर विचार साझा किए। शख्स की गरिमा और सुरक्षा को किसी भी रिश्ते से ऊपर बताते हुए निवासियों ने सोच में बदलाव लाने की बात कही।