परिवार न पहचान, फिर भी ‘खून का रिश्ता’ बना दे रहे नई ज़िंदगी

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गुड़गांव के कुछ लोग रक्तदान को जीवन का मकसद बना चुके हैं। संतोष पाल 102 बार, जितेंद्र सुखराली 54 बार, रोहिताश शर्मा 53 बार और गुरिंदर जीत सिंह 45 बार रक्तदान कर चुके हैं। ये लोग अनजाने लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रक्तदान से जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिलती है।

giving life to strangers meet gurugrams blood heroes on world blood donor day

n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

कई बार जिंदगी और मौत के बीच महंगी दवा या इलाज नहीं सिर्फ एक यूनिट खून होता है। ऐसे में जब कोई अनजान रक्तदाता आगे आता है तो वो केवल रक्तदान नहीं करता बल्कि एक नई जिंदगी देता है। आज वर्ल्ड ब्लड डोनर डे पर जानिए मिलेनियम सिटी के उन हीरोज के बारे में जिन्होंने इस जरूरत को सिर्फ समझा नहीं बल्कि इसे अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया। किसी ने 100 से ज्यादा तो किसी ने 50 से अधिक बार स्वेच्छा से रक्तदान कर न जाने कितनी जिंदगियों को बचाया।

102 बार कर चुके रक्तदान: सेक्टर-37 के संतोष पाल (51) ने 18 साल की उम्र में पिता को पहली बार रक्त दिया था। तब उन्होंने देखा कि कई बार सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को भी रक्त की कमी पूरी करने के लिए आगे आना पड़ता है। तब उन्होंने रक्तदान का संकल्प लिया। आज संतोष 102 बार रक्तदान कर चुके हैं और कई जरूरतमंदों की मदद कर चुके हैं। उनके इस योगदान के लिए 2023 में उन्हें रोटरी क्लब ने सम्मानित भी किया।

दोस्त की मौत ने बदल दी जिंदगी : सुखराली गांव के जितेंद्र सुखराली (48) बताते हैं कि ITI के दौरान उनके एक दोस्त का एक्सिडेंट हुआ और समय पर खून न मिलने से मौत हो गई। तब उन्होंने संकल्प लिया कि उनकी जानकारी में किसी की जान रक्त की कमी से नहीं जानी चाहिए। आज जितेंद्र 54 बार रक्तदान कर चुके हैं और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा रहे हैं। उन्हें 2005 और 2024 में सरकार की तरफ से सम्मानित भी किया गया।

रक्तदान को बना लिया जीवन का हिस्सा : विष्णु गार्डन निवासी रोहिताश शर्मा (46) ने NCC कैंप में पहला रक्तदान करने के बाद इसे जीवन का हिस्सा बना लिया। वह रेड क्रॉस से जुड़कर हर साल करीब 25 रक्तदान शिविर लगाते हैं और खुद 53 बार रक्तदान कर चुके हैं। रोहिताश कहते हैं कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद जिले में जरूरत के मुकाबले अब भी करीब 40 फीसदी रक्त की कमी है। ऐसे में लोगों को आगे आना चाहिए।

सेवा नहीं, जिम्मेदारी निभाने का जरिया : अर्जुन नगर के गुरिंदर जीत सिंह लंबे समय से रक्तदान अभियान से जुड़े हैं। पेशे से इंजीनियर गुरिंदर RSS के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। उन्होंने अब तक 45 बार रक्तदान किया है और औसतन हर साल तीन बार रक्तदान करते हैं। गुरिंदर बताते हैं कि रक्तदान उनके लिए सिर्फ सेवा नहीं बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक माध्यम है।