DLF में सीलिंग के बाद घर की तलाश में भटक रहे हज़ारों लोग

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dlf sealing thousands homeless rents skyrocket appeal to administration
n NBT न्यूज, गुड़गांव

डीएलएफ क्षेत्र में अवैध पीजी, गेस्ट हाउस और आवासीय प्लॉटों पर चल रहे सीलिंग व तोड़फोड़ अभियान का असर अब किरायेदारों पर दिखाई देने लगा है। हजारों किरायेदारों और पेइंग गेस्ट के सामने नया ठिकाना तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। मांग अचानक बढ़ने से सेक्टर-52, 53 समेत आसपास के इलाकों में पीजी और फ्लैट का किराया तेजी से बढ़ गया है। कई स्थानों पर पहले से उपलब्ध मकान भी हाथों-हाथ बुक हो रहे हैं। नौकरीपेशा युवाओं, छात्रों और परिवारों के लिए कम समय में किफायती घर ढूंढ़ना मुश्किल होता जा रहा है।
30 जून तक वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने की डीटीपी एनफोर्समेंट की एडवाइजरी के बाद बड़ी संख्या में लोग नए मकानों की तलाश में जुटे हैं। इसका सीधा फायदा प्रॉपर्टी बाजार को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जिस पीजी या फ्लैट का किराया कुछ दिन पहले तक तय था, अब उसी के लिए अधिक रकम मांगी जा रही है। कई मकान मालिक बढ़ी मांग का फायदा उठाकर किराया बढ़ा रहे हैं। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग लगातार अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं। कोई लिख रहा है कि पूरा दिन मकान देखने के बाद भी बजट में घर नहीं मिल रहा, तो कोई बढ़े हुए किराये को लेकर नाराजगी जता रहा है। कई लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि कार्रवाई के साथ प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और पर्याप्त समय भी सुनिश्चित किया जाए। एक महिला ने अपने इंस्टाग्राम पर विडियो पोस्ट की है कि तोड़फोड़ और सीलिंग कार्रवाई के बाद आसपास के एरिया में जो फ्लैट 25 हजार में मिल रहे थे, अब वही 40 से 50 हजार तक में मिल रहे हैं। कम करने पर मकान मालिक की ओर से जवाब आता है कि मत लो, कहीं और घर देखो।

नीति की मांग हुई तेज : प्रभावित लोगों का कहना है कि वे अवैध निर्माण का समर्थन नहीं करते, लेकिन सरकार को ऐसा व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए, जिससे आम लोगों को बेघर होने की नौबत न आए। नियमितीकरण नीति, चरणबद्ध कार्रवाई और पर्याप्त समय दिए बिना हो रही सीलिंग से हजारों लोग संकट में आ गए हैं। लोगों ने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने और समाधान निकलने तक अभियान पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पांच से छह दिन में नया घर वो भी बजट के हिसाब से मिलना काफी मुश्किल है।

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