मोदी के नेतृत्व में देश के साथ बिहार की भी बदली तस्वीर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 4,399 दिन के कार्यकाल ने भारतीय लोकतंत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस दौरान बिहार में भी उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। मिथिला पेंटिंग और मखाना जैसे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है। सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को विकास से जोड़ा गया है।

bihars transformed picture under modis leadership development culture and global identity

नरेंद्र मोदी द्वारा बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री लगातार 4,399 दिन पूरे करना और इस क्रम में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रेकॉर्ड को पीछे छोड़ना भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब देश में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की बड़ी संख्या मौजूद है, जबकि नेहरू जी के समय में कांग्रेस ही देश की एकमात्र प्रमुख राजनीतिक शक्ति थी।

बिहार में बदलाव

इस रेकॉर्ड का विशेष महत्व इसलिए भी है कि नरेंद्र मोदी किसी राजनीतिक परिवार के वारिस के रूप में राजनीति में स्थापित नहीं हुए, बल्कि अपने परिश्रम और जनसमर्थन के बल पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनके नेतृत्व की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल राजनीतिक स्थायित्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि उस परिवर्तनकारी यात्रा की कहानी भी है, जिसने भारत के अनेक क्षेत्रों, विशेषकर बिहार और पूर्वोत्तर भारत को विकास की मुख्य धारा से जोड़ा है।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों के दौरान तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में बिहार की स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। आज बिहार केवल जनसंख्या या इतिहास के संदर्भ में नहीं, बल्कि नए अवसरों, संभावनाओं और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण भी राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

मखाना बोर्ड की स्थापना

मेरे लिए यह विशेष संतोष का विषय है कि प्रधानमंत्री ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर बार-बार सम्मान दिलाया। मिथिला पेंटिंग इसका सबसे सुंदर उदाहरण है। यह प्राचीन लोककला आज भारत की सांस्कृतिक पहचान बनकर विश्व के प्रमुख मंचों तक पहुंच रही है। प्रधानमंत्री जब विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और गणमान्य व्यक्तियों को मधुबनी पेंटिंग आधारित उपहार भेंट करते हैं, तब वह केवल एक कलाकृति नहीं होती, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक चेतना, परंपरा और सृजनशीलता का वैश्विक परिचय होती है।

इसी प्रकार वर्षों तक स्थानीय उत्पाद के रूप में पहचाना जाने वाला मखाना आज वैश्विक बाजार में ‘सुपर फूड’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जीआई टैग प्राप्त होने के बाद इसके महत्व को नई मान्यता मिली। केंद्रीय बजट में मखाना बोर्ड की घोषणा और उसके बाद की गई संस्थागत पहल ने यह संदेश दिया कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाने की सोच अब नीति निर्माण का हिस्सा है।

मिथिला की पहचान मजबूत

प्रधानमंत्री ने विकास को केवल सड़कों, पुलों, भवनों और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों, परंपराओं तथा पर्यटन की संभावनाओं को भी विकास की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया। यही कारण है कि आज अयोध्या, काशी, केदारनाथ और पूर्वोत्तर के सांस्कृतिक केंद्रों के साथ-साथ माता सीता की पावन भूमि मिथिला की पहचान भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूती से स्थापित हुई है।

हाल के वर्षों में भारत की विदेश नीति और कूटनीति में भी उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विभिन्न देशों में भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का उद्देश्य भी यही था कि दुनिया भारत की वास्तविक चिंताओं और आतंकवाद के विरुद्ध उसके दृढ़ संकल्प को और बेहतर ढंग समझे। मुझे भी ऐसे ही एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का अवसर मिला।

पीएम का दूरदर्शी नेतृत्व

बिहार जैसे विकास की चुनौतियों से जूझते रहे राज्यों के लिए यह अवधि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय विकास की धारा में अधिक सम्मानजनक और सक्रिय स्थान प्राप्त हुआ है। खासकर पिछले दो केंद्रीय बजटों में बिहार को विशेष आर्थिक सहयोग मिला है। चाहे आधारभूत संरचना का विस्तार हो, नए एक्सप्रेस-वे, पुल, रेलवे परियोजनाएं, एयरपोर्ट विकास या कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई पहचान दिलाने की पहल, बिहार को विकास की नई संभावनाओं से जोड़ने का निरंतर प्रयास हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा स्थापित ‘न्याय के साथ विकास’, सुशासन और बुनियादी ढांचे के सशक्तिकरण की परंपरा को मोदी सरकार के सहयोग से आगे भी नई गति और नई ऊंचाई मिलती रहेगी, ऐसा मुझे विश्वास है।

कुल मिलाकर, नरेंद्र मोदी जी का बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री लगातार 4,399 दिनों का यह नया रेकॉर्ड केवल एक संख्या नहीं है। यह उस विश्वास, निरंतरता और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है, जिसने भारत के अनेक हिस्सों, विशेषकर बिहार और पूर्वोत्तर भारत को नए अवसरों, नई पहचान और नई संभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। लोकतंत्र में किसी भी लंबे और सफल नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी यही होती है।

(लेखक जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद हैं)