‘30 तक तीनों हॉल बहाल करें, नहीं तो 1 जुलाई से खुद ही बैठने लगेंगे’

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव अदालत परिसर में आग लगने के बाद वकीलों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बार एसोसिएशन ने प्रशासन से 30 जून तक हॉल नंबर 1, 2 और 3 को बहाल करने की मांग की है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 1 जुलाई से वकील स्वयं इन हॉलों में बैठना शुरू कर देंगे।

courts three halls to be restored by june 30 otherwise lawyers will sit themselves from july 1

n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव

अदालत परिसर में हाल ही में लगी आग के बाद हॉल नंबर 1, 2 और 3 में बैठकर प्रैक्टिस करने वाले करीब एक हजार वकीलों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बार असोसिएशन का कहना है कि अधिकारियों के शुरुआती आकलन में इन तीनों हॉलों को कोई संरचनात्मक नुकसान नहीं पाया गया था, इन्हें केवल एहतियातन बंद किया गया। बावजूद इसके अब तक वकीलों को दोबारा वहां बैठने की अनुमति नहीं मिली है, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है।

इस मुद्दे पर बुधवार को डिस्ट्रिक्ट बार असोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन से मांग की कि 30 जून तक इन हॉलों को शुरू कराया जाए। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि 30 जून तक बैठने की अनुमति नहीं मिली तो 1 जुलाई से वे स्वयं आकर इन तीनों हॉलों में बैठ जाएंगे। प्रेजिडेंट चंद्रकांत शर्मा ने बताया कि आग से रिकॉर्ड और भवन के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा है, लेकिन सेशन जज और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में यह बात सामने आई है कि हॉल नंबर 1, 2 और 3 में कोई गंभीर क्षति नहीं हुई। ऐसे में वकीलों को अनिश्चितता में रखना ठीक नहीं है और प्रशासन को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

अधिकतर वकीलों के पास निजी चैंबर नहीं: बार असोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट कुलभूषण भारद्वाज ने कहा कि इन हॉलों में बैठने वाले अधिकतर वकीलों के पास निजी चैंबर नहीं हैं। आग के बाद वे अस्थायी व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं, जिसका असर न सिर्फ अधिवक्ताओं पर बल्कि हजारों क्लाइंट्स पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर बार की ओर से एक कमिटी बनाई जाएगी, जो समाधान के लिए प्रशासन से संवाद करेगी।

वकीलों के लिए चैंबरों की मांग दोहराई: इस दौरान बार असोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट संतोख सिंह ने वकीलों के लिए चैंबरों की पुरानी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से टावर ऑफ जस्टिस परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन अब तक वहां वकीलों के लिए चैंबर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस दौरान चंद्रकांत शर्मा ने घोषणा की कि वकीलों के चैंबरों के लिए भूमि आवंटन की मांग को लेकर एक अलग कमिटी बनाई जाएगी। यह समिति पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और हरियाणा सरकार के समक्ष वकीलों की यह मांग रखेगी।