सही भाव या बुलबुला

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इलॉन मस्क की स्पेसएक्स का आईपीओ आज खुल रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिक इशू है। कंपनी 75 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रख रही है। पश्चिम एशिया संकट के बावजूद, बाजार में उत्साह है। हालांकि, कंपनी घाटे में है और जवाबदेही की कमी भी एक चिंता का विषय है। चीन से प्रतिस्पर्धा भी एक अहम मुद्दा है।

spacex ipo is it fair value or just a bubble

इलॉन मस्क की SpaceX का IPO आज खुलने जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिक इशू है। कंपनी ने इससे लगभग 75 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा है। पश्चिम एशिया संकट की वजह से इस समय ग्लोबल इकॉनमी जिस दबाव से गुजर रही है, उसे देखते हुए इतने बड़े IPO से बाजार का चेहरा खिल जाना चाहिए था, लेकिन इसके साथ कुछ आशंकाएं भी हैं।

घाटे में कंपनी । SpaceX के मुख्य रूप से तीन कारोबार हैं - स्टारलिंक , स्पेस बिजनेस और AI बिजनेस। इसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का काम xAI के जिम्मे है, जिसकी स्थापना मस्क ने तीन साल पहले की थी और फिर इसका SpaceX में विलय कर दिया गया। SpaceX को 2025 में 18.7 अरब डॉलर के राजस्व पर 4.9 अरब डॉलर का घाटा हुआ था। AI इकाई तो भारी घाटे में है, पिछले साल इसने 6.4 अरब डॉलर का नुकसान उठाया।

बुलबुला तो नहीं । SpaceX के बाद एंथ्रोपिक और OpenAI भी साल के अंत तक अपने IPO ला सकते हैं। इन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भले कड़ी हो, लेकिन आर्थिक कहानी लगभग एक जैसी है। एंथ्रोपिक को जून तिमाही में पहली बार लगभग 55.9 करोड़ डॉलर का मुनाफा हुआ है। वहीं, OpenAI अब भी कमाई से दोगुना अधिक खर्च कर रही है। इतनी नाजुक वित्तीय सेहत के बावजूद अगर मार्केट में इन कंपनियों को लेकर उत्साह है, तो उसकी बस एक वजह है, AI से लगाई गई उम्मीद। पर इसके साथ आशंका भी है कि कहीं आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का बुलबुला फूटने वाला तो नहीं, जिसकी चिंता लंबे वक्त से जताई जा रही है।

जवाबदेही की कमी । इन कंपनियों में इनके संस्थापकों का कड़ा नियंत्रण है और इस तरह का कॉरपोरेट ढांचा तैयार किया गया है कि आगे भी वे मजबूत बने रहेंगे। मसलन, SpaceX में मस्क के पास सुपर वोटिंग राइट्स मौजूद हैं यानी शेयर बेचने से भी उनकी ताकत कम नहीं होगी। लेकिन, इससे शेयरधारकों के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता में कमी का खतरा है।

चीन से होड़ । दुनिया के लगभग 90% AI इंफ्रा पर चीन और अमेरिका का कब्जा है। चीन अपनी कंपनियों को सरकारी मदद देता है। यदि वह कम लागत में AI मॉडल तैयार करता है, तो US कंपनियों की इतनी ऊंची वैल्यूएशन पर सवाल खड़े होंगे। फिर, AI में बुनियादी ढांचे के लिए अरबों डॉलर चाहिए। मस्क जो पैसा जुटाने जा रहे हैं, उसका इस्तेमाल AI, स्टारशिप और मंगल मिशन पर होगा। उन्हें फिलहाल निवेशक मिल रहे हैं, क्योंकि तकनीक में भविष्य दिख रहा है, पर बाजार में असल चीज है मुनाफा।