2027 फतह को बिछने लगी सियासी बिसात

नवभारत टाइम्स

2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेरठ और जेवर में जनसभाएं हो रही हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी दादरी में रैली करेंगे। राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी जयंत गुर्जर और जाट समाज को साधने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक दल अपनी ताकत बढ़ाने में जुट गए हैं।

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वेस्ट यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अभी से महसूस होने लगी है। राजनीतिक पारा चढ़ चुका है और सभी दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेरठ और जेवर में होने वाली जनसभाएं, गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, समाजवादी पार्टी की दादरी में होने वाली रैली, और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की गतिविधियां, ये सब मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा रहे हैं। गुर्जर और जाट समाज को साधने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं, जो आने वाले समय में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ में नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो का लोकार्पण कर चुनावी माहौल को गरमा दिया था। अब 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री की एक बड़ी जनसभा जेवर में प्रस्तावित है। इसके साथ ही, मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण को भी एक बड़े राजनीतिक आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी इन विकास परियोजनाओं के ज़रिए जनता के बीच विकास का संदेश पहुंचाना चाहती है।
प्रधानमंत्री की जेवर रैली के ठीक अगले दिन, 29 मार्च को दादरी में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की भी एक जनसभा होने वाली है। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिनेश गुर्जर का कहना है कि दादरी का यह सम्मेलन यूपी की सियासत में 2027 की सरकार बनाने में एक अहम पड़ाव साबित होगा। यह आयोजन प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा तय करेगा।

इस बीच, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया चौधरी जयंत ने भी अपनी राजनीतिक चालें चलनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने 14 मार्च, 2026 को दादरी (ग्रेटर नोएडा) में स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक की जयंती पर आयोजित समारोह में भाग लेकर गुर्जर समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश की थी। अब 22 मार्च को, जेडीयू छोड़ने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी को रालोद में शामिल करके पार्टी वेस्ट यूपी में अपनी सियासी ताकत बढ़ाने का काम करेगी और 'कुनबा बढ़ाओ' अभियान को और तेज़ करेगी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति भी सक्रिय हो रही है। मेरठ और मुजफ्फरनगर की सीमा पर स्थित सकौती गांव में 29 मार्च को इंटरनैशनल जाट पार्लियामेंट द्वारा महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के लिए एक जनसभा का आयोजन किया गया है। यह आयोजन जाट समुदाय को एकजुट करने और उनकी राजनीतिक आवाज़ को मज़बूत करने का एक प्रयास है। इन सभी राजनीतिक गतिविधियों से साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से ज़ोरों पर है और वेस्ट यूपी चुनावी रणक्षेत्र बनने वाला है।