स्मॉल-कैप हुए सस्ते, निवेश का सही समय है?

नवभारत टाइम्स

दुनिया में चल रहे तनाव का असर स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। इन कंपनियों के शेयर अपनी पिछली औसत कीमतों से काफी नीचे आ गए हैं। यह स्थिति निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका बन सकती है। लार्ज-कैप और मिड-कैप की तुलना में स्मॉल-कैप शेयर ज्यादा सस्ते हुए हैं। यह विश्लेषण BSE 500 इंडेक्स पर आधारित है।

स्मॉल-कैप हुए सस्ते, निवेश का सही समय है?
(फोटो- नवभारत टाइम्स)

NBT रिपोर्ट : दुनिया में चल रहे तनाव और अनिश्चितता का सबसे बुरा असर स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयरों पर पड़ रहा है। ET के मुताबिक, स्मॉल-कैप शेयरों की वैल्यू में बड़ी कंपनियों के मुकाबले कहीं ज्यादा गिरावट आई है।

इस समय BSE 500 इंडेक्स में शामिल 58.3% स्मॉल-कैप शेयर अपनी पिछले तीन साल की औसत कीमत (वैल्यूएशन) से नीचे कारोबार कर रहे हैं। वहीं, लार्ज-कैप और मिड-कैप सेगमेंट में ऐसे शेयरों की संख्या 50% से भी कम है। इसका मतलब है कि स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर, लार्ज कैप के मुकाबले बहुत तेजी से 'ओवरसोल्ड' जोन (जहां बिकवाली बहुत ज्यादा हो चुकी हो) में जा रहे हैं।

अगर पिछले सात साल के औसत वैल्यूएशन को देखें, तो स्मॉल-कैप की 46% कंपनियां सस्ती (undervalued) नजर आ रही हैं। इसकी तुलना में लार्ज-कैप की 41% और मिड-कैप की 34% कंपनियां ही सस्ती हैं। अगर हम 10 साल की बात करें तो 42% स्मॉल-कैप शेयर सस्ते लग रहे हैं, जबकि लार्ज-कैप में यह आंकड़ा 37% और मिड-कैप में 39% है।

BSE 500 की सभी कंपनियों की बात करें, तो आधे से ज्यादा यानी 52% शेयर तीन साल के नजरिए से अपनी सही कीमत से नीचे हैं। सात साल के लिए यह आंकड़ा 41% और 10 साल के लिए 31% है।

इसके अलावा, टेक्निकल नजरिये से देखें तो फिलहाल 90% स्मॉल-कैप शेयर अपने 200 दिनों के औसत (200 DMA) से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। इसकी तुलना में 63% लार्ज-कैप और 74% मिड-कैप शेयर ही इस स्तर से नीचे हैं। इससे पता चलता है कि स्मॉल-कैप शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

इस विश्लेषण के लिए BSE 500 इंडेक्स की उन कंपनियों को लार्ज-कैप माना गया है जिनकी मार्केट वैल्यू 50,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है। 20,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों को मिड-कैप और बाकी कंपनियों को स्मॉल-कैप कहा गया है।