ग्लोबल टेंशन का असर

नवभारत टाइम्स

वैश्विक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिख रहा है। बीएसई 500 इंडेक्स की आधी से अधिक स्मॉल-कैप कंपनियां अपने तीन साल के औसत मूल्यांकन से नीचे कारोबार कर रही हैं। तकनीकी चार्ट पर भी 90% स्मॉल-कैप शेयर 200 दिनों के मूविंग एवरेज से नीचे हैं। यह स्थिति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।

impact of global tension small cap stocks see sharp decline valuations below 3 year average
भारतीय शेयर बाज़ार में स्मॉल-कैप कंपनियों की हालत खस्ता है। BSE 500 इंडेक्स की आधे से ज़्यादा स्मॉल-कैप कंपनियाँ अपने 3 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे चल रही हैं। तकनीकी चार्ट पर भी 90% स्मॉलकैप शेयर 200 दिनों के मूविंग एवरेज (DMA) से नीचे कारोबार कर रहे हैं। यह बताता है कि बाज़ार में स्मॉल-कैप शेयरों में भारी गिरावट आई है।

अगर हम औसत समय के हिसाब से देखें तो, पिछले 3 सालों में 58.3% स्मॉल-कैप शेयर अपने वैल्यूएशन से नीचे बिक रहे हैं। यह स्थिति 7 साल पहले 46% और 10 साल पहले 42% थी। इसका मतलब है कि स्मॉल-कैप कंपनियों का सस्ता होना एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति है।
बाज़ार पूंजीकरण के हिसाब से कंपनियों को बांटा गया है। लार्ज-कैप कंपनियाँ वो हैं जिनका बाज़ार मूल्य 50,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। मिड-कैप कंपनियाँ 20,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये के बीच आती हैं। और स्मॉल-कैप कंपनियाँ 20,000 करोड़ रुपये से कम बाज़ार मूल्य वाली होती हैं। फिलहाल, स्मॉल-कैप सेगमेंट में ज़्यादातर कंपनियाँ अपने ऐतिहासिक वैल्यूएशन से नीचे हैं, जो निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय है।