हाई कोर्ट के आदेश पर चल रही जांच ने आगरा कमिश्नरेट पुलिस में हलचल मचा दी है। पिछले दो दिनों से ईसी ऐक्ट के विशेष न्यायाधीश की अदालत में चल रही इस जांच में एसीपी स्तर के 14 अधिकारियों को तलब किया गया है। उनसे पूछा गया है कि बीते महीनों में सैकड़ों लोगों को शांतिभंग की धारा में जेल क्यों भेजा गया, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में जमानत दी जानी चाहिए। यह पूरा मामला तब सामने आया, जब अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति और आगरा के प्रशासनिक न्यायाधीश जेजे मुनीर से पुलिस की कार्यप्रणाली की शिकायत की। आरोप था कि एसीपी को मिली कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है और लोगों को बिना पर्याप्त कारण जेल भेजा जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की। विशेष न्यायाधीश ज्ञानेंद्र राव को जांच अधिकारी बनाया गया। जांच के दौरान पता चला कि 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच सिर्फ 59 दिनों में 493 लोगों को शांतिभंग के आरोप में जेल भेजा गया। सोमवार को एसीपी अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए, जबकि मंगलवार को प्रभावित लोगों को बुलाकर उनके बयान लिए गए। कई मामलों में बुजुर्गों को भी जेल भेजने की बात सामने आई है। एक पीड़ित इमरान ने अदालत में बताया कि उसे 13 फरवरी को घर के बाहर से उठाया गया, घंटों थाने में बैठाया गया और फिर जेल भेज दिया गया। तीन दिन बाद उसे जमानत मिली। अब पूरी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजी जाएगी। इसके बाद क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर पुलिस महकमे में बेचैनी बनी हुई है।

